नई टिहरी। जिला पंचायत की लापरवाही चंबा ब्लॉक के जिजली, काणीगाड और सिल्लासौड़ तोक में निवासरत लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। तीन तोकों को जोड़ने वाले पैदल पुल की स्थिति खस्ताहाल बनी है। खतरे के बीच काणीगाड गदेरे में जर्जर पुल से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को आवागमन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
वर्ष 2025 सितंबर में आपदा से काणीगाड गदेरे पर बना जिजली, काणीगाड और सिल्लासौड़ तोक को जोड़ने वाला पैदल पुल जर्जर हो गया था। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी पुल की न तो मरम्मत और न ही पुनर्निर्माण कार्य हो पाया। बनाली की ग्राम प्रधान उर्मिला देवी व जिला पंचायत सदस्य सौड़ गीता डबराल ने बताया कि गत वर्ष सितंबर माह में काणीगाड गदेरे में आपदा आने से बरसाती पानी के साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी और पत्थर आने से गांवों को जोड़ने वाले बहने का खतरा बन गया था।
पुल बहने से बच गया लेकिन पुल की नींव पूरी तरह कमजोर हो गई है। आपदा के कारण आया मलबा अभी पुल के नीचे भारी मात्रा में जमा है। ऐसे में काणीगाड गदेरे में पानी का बहाव तेज होने से पुल के क्षतिग्रस्त होने की संभावना बनी है जिसके बाद ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह से प्रभावित हो सकती है। गांवों में सड़क सुविधा न होने से ग्रामीणों के एक मात्र आवाजाही साधन यही पैदल पुल है। ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चे भी रोज इसी पुल से आवाजाही करते हैं। पुल तक पहुंचने के रास्ते भी आपदा के कारण कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो रखे हैं। आपदा के बाद से पुल के पुनर्निर्माण के लिए लगातार प्रशासन और जिला पंचायत से पत्राचार किया जा रहा है।
काणीगाड गदेरे में आपदा से क्षतिग्रस्त पुल का इंजीनियर की ओर से इस्टीमेट तैयार किया है। जिसे आपदा प्रबंधन विभाग को भेजा गया है। धनराशि मिलने के बाद ही पुल के पुनर्निर्माण का कार्य करवाया जाएगा।
-गणेश भट्ट, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत टिहरी।