फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जरा ठंडू चला दी.. के गायक चंद्र सिंह की जीवन यात्रा रुकी

Sun, 10 Jan 2016 10:11 PM IST
सतपुली
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंडी लोक संस्कृति के पुरोधा चंद्र सिंह राही के जाने से उनकी लोकगायकी का सूनापन लंबे समय तक सालता रहेगा। पिछले पांच दशकों से वह अपने गीतों के जरिए उत्तराखंडी जनमानस के अंत:पटल पर छा गए थे।
विज्ञापन

वर्ष 1963 में आकाशवाणी दिल्ली के लोकगीतों पर आधारित कंपीटीशन जीतने के बाद राही ने वहीं से फौजी भाइयों के लिए प्रसारित कार्यक्रम से लोक गायकी की शुरुआत की। इसके बाद आकाशवाणी दिल्ली, लखनऊ और नजीबाबाद से प्रसारित उनके  गीतों 'हिलमा चांदी कु बटणा.., 'रूपा कि खज्यनी हे भग्यनी कन छै.., 'जरा ठंडू चलादी.., 'भाना हे रंगीली भाना.., 'सौली घुर्रा घुर्र दगडया.., 'सतपुली का सैंणा.., 'फ्यूंलडिया त्वै देखिकी आदूं यू मनमा.., जैसे कालजयी गीतों से वे घर-घर में छा गए। श्री राही गायक और संगीतकार होने के साथ ही कई पारंपरिक वाद्य यंत्रों को बजाने में माहिर थे। लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित चंद्र सिंह राही पिछले डेढ़ दो दशकों से उत्तराखंडी लोकगीतों के गिरते स्तर से बेहद व्यथित थे। कई बार व्यक्तिगत चर्चा में कहते थे कि उत्तराखंडी गीतों में मुर्गी बांद, फुरकी बांद, छकना बांद जैसे शब्दों से गीत का कम गलियों का आभास ज्यादा होता है।

अपने पिता से ली थी प्राथमिक शिक्षा
सतपुली। लोकगायक चंद्र सिंह राही का जन्म एकेश्वर प्रखंड की उत्तरी मौंदाडस्यूं पट्टी के गिंवाली गांव में इलाके के प्रख्यात जागरी दिलबर सिंह के यहां 28 मार्च 1942 को हुआ था। संगीत एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्राथमिक दीक्षा उन्होंने अपने पिता से ली थी। एमटीएनएल दिल्ली में 20 वर्षों की सेवा के बाद उन्होंने लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2000 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। वर्तमान में उनके ज्येष्ठ पुत्र वीरेंद्र सिंह नेगी प्रख्यात संगीतकार और उनके अनुज देवराज रंगीला भी प्रसिद्ध लोक गायक हैं। राही ने लोक संस्कृति पर आधारित एक पुस्तक रमछोल भी लिखी।
विज्ञापन


सिद्धबली मंदिर समिति ने दी श्रद्धांजलि
कोटद्वार। गढ़वाली लोक गायक चंद्र सिंह राही के निधन पर श्री सिद्धबली मंदिर समिति ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। लैंसडौन विधायक और मंदिर के महंत दिलीप रावत ने कहा कि चंद्र सिंह राही ने लोक गायक विद्या को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके गानों को लोग भूल नहीं पाएंगे। इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंज विहारी देवरानी, रविंद्र नेेगी, अनिल बिट्ठल, शिवप्रसाद पोखरियाल, सुनील गोयल, ओमप्रकाश तिवारी, आरसीएस रावत, लाल सिंह और विवेक अग्रवाल आदि थे।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें