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भैलो खेलकर मनाई इगास

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कोटद्वार में भैलो खेलकर इगास पर्व की खुशी मनाते लोग। - फोटो : KOTDWAR
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सामाजिक संस्था उत्तराखंड रायजिंग की ओर से लोकपर्व इगास सामूहिक रूप से धूमधाम से मनाया गया। इगास कार्यक्रम में कवियों ने कविताओं के माध्यम से गांव, खलिहान, तीज-त्योहारों की याद दिलाई। लोगों ने स्वाले, अरसे और पकोड़े बांटते हुए भैलो खेलकर इगास की खुुशी मनाई।
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जीजीआईसी कोटद्वार में वरिष्ठ साहित्यकार योगेेश पांथरी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का समाजसेवी सत्यप्रकाश थपलियाल, गिरिराज सिंह रावत, योगंबर सिंह रावत और डॉ. नंद किशोर ढौंडियाल ने शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता डॉ. नंद किशोर ढौंडियाल ने कहा कि उत्तराखंड की बोली, पौराणिक परंपराएं, लोक संस्कृति हर तरह से समृद्ध है, लेकिन लोग अपनी संस्कृति-परंपराओं को भूलते जा रहे हैं। इसको बचाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। वरिष्ठ साहित्यकार योगेश पांथरी ने लोगों से अपनी लोक परंपराओं को जीवित करने की अपील की।
इस अवसर पर आयोजित गढ़वाली कविता सम्मेलन में कवि अनसूया प्रसाद ने अपनी कविता कख गे मेरी गौं कि व शान, किलै गौं आज हुयां छन बीरान... के माध्यम से पलायन कर चुके लोगों को सोचने पर मजबूर किया। इसके बाद कवि यतेंद्र गौड़, ऋद्धि भट्ट, ललन बुड़ाकोटी ने एक से बढ़कर एक गढ़वाली कविताओं से इगास पर समा बांधा। संस्था के संस्थापक राकेश मोहन ध्यानी के गढ़वाली गीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत में लोगों ने एक दूसरे को स्वाले, अरसे और पकोड़े बांटे और भैलो जलाकर इगास की खुशी मनाई। इस अवसर पर संस्था सचिव प्रणिता कंडवाल, विद्यालय की प्रभारी प्रधानाचार्य रेनू गौड़, गोविंद डंडरियाल, ओमप्रकाश कबटियाल, रंजना रावत, बीना रावत, बबीता ध्यानी, उमा बड़ाकोटी और सुदीप बौंठियाल आदि मौजूद थे। संचालन सुभाष नौटियाल ने किया।
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