अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या के एक मामले में पति को दोषी पाते हुए उसे सात साल की कैद और छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने इसी मामले में आरोपी बनाए गए सास, ससुर और देवर को दोषमुक्त कर दिया। कहा कि अभियोजन पक्ष सास, ससुर और देवर पर अपराध साबित करने में विफल रहा है।
शासकीय अधिवक्ता नसीम बेग ने बताया कि 21 अगस्त, 2014 को दीपेंद्र सिंह नेगी ने पुलिस में एक मुकदमा दर्ज कराया। इसमें उसकी बहन शांति देवी के पति सुरेंद्र सिंह, ससुर मंगल सिंह, सास गुड्डी देवी और देवर नरेंद्र सिंह पर दहेज हत्या और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया। तहरीर में बताया कि उसकी बहन शांति देवी की शादी हिंदू रीति रिवाज से 14 अप्रैल, 2013 दुगड्डा कस्बे के पास छोटी गोदी नेपालगंज गांव निवासी सुरेंद्र सिंह के साथ हुई थी।
शादी के बाद से ही ससुराली उसे कम दहेज के लिए तंग करने लगे थे। 19 अगस्त, 2014 को ससुरालियों ने उसे जबरन जहर देकर मार दिया। प्रतिवादियों ने अपराध कारित करने से इंकार करते हुए परीक्षण की मांग न्यायालय से की।
अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में नौ गवाहों को पेश किया गया। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जहां पति सुरेंद्र सिंह को दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का दोषी पाते हुए सजा सुनाई, वहीं सास, ससुर और देवर को दोषमुक्त करने के आदेश दिए। अदालत ने पति को दहेज उत्पीड़न में तीन साल की कैद, एक हजार रुपये जुर्माना और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण में सात साल की कैद और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।