संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। दुगड्डा ब्लॉक के आपदा प्रभावित गांव आमसौड़ की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आपदा से क्षतिग्रस्त गांव की पेयजल लाइन की मरम्मत तीन माह बाद भी नहीं हो पाई है। बरसात खत्म होते ही प्राकृतिक स्रोत सूख चुके हैं। इससे ग्रामीणों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से पेयजल लाइन की मरम्मत कराकर गांव में पेयजल की आपूर्ति सुचारू करने की मांग की है।
दुगड्डा ब्लॉक के आमसौड़ गांव निवासी मक्खन लाल, विनोद चंद्र, योेगेंद्र प्रसाद, सोनी नेगी, धीरेंद्र प्रसाद, गणेश जुयाल, इंद्रमोहन जुयाल, शकुंतला देवी, सुमन देवी, आरती देवी आदि ने बताया कि उनके गांव के लिए हल्दवानी गदेरे से पेयजल योजना बनाई गई है।
बीते 23 अगस्त को हुई भारी बारिश के दौरान दुर्गादेवी के समीप भूस्खलन होने से उनके गांव की पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके साथ ही आपदा में गांव का प्राकृतिक स्रोत भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। ग्रामीण बरसाती स्रोतों से पानी की व्यवस्था कर अब तक किसी तरह काम चला रहे थे, लेकिन अब बरसाती गदेरे भी पूरी तरह सूख चुके हैं।
इससे ग्रामीणों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत पालतू पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करने में हो रही है। स्थिति यह है कि गांव के 85 परिवार एक हैंडपंप के भरोसे हैं। आरोप लगाते हुए कहा कि पेयजल निगम को समस्या से अवगत कराने के बाद भी विभाग पेयजल लाइन की मरम्मत नहीं करा पा रहा है। ग्रामीणों ने पेयजल आपूर्ति सुचारू न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।