संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। विभिन्न संगठनों ने अनुसूचित जाति की 19 महिलाओं समेत 23 लोगों के खिलाफ पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमे को एकतरफा कार्रवाई बताते हुए विरोध शुरू हो गया है। विभिन्न संगठनों ने मामले की जांच कराकर लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की है। इस संबंध में तहसीलदार साक्षी उपाध्याय के माध्यम से डीजीपी, जिलाधिकारी, महिला व मानवाधिकार आयोग को ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखंड और यूपी की सीमा से सटे देवरामपुर में 19 अक्तूबर को तल्ला मोटाढाक के कुछ युवाओं ने उनसे जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उनकी बस्ती की ओर पटाखे फोड़े। कई बार उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए कहा गया, लेकिन वे नहीं माने। 21 अक्तूबर की रात को भी कुछ युवाओं ने बस्ती की महिलाओं के साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर बस्ती में आग लगाने की धमकी दी, जिसे विवाद की स्थिति पैदा हुई। बस्ती की महिलाओं ने कोतवाली पहुंचकर पुलिस से शिकायत की, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और ना ही उनकी रिपोर्ट ही दर्ज की। कहा कि वहीं नामजद आरोपियों ने बस्ती के कुछ लोगों के खिलाफ यूपी के जाफराबाद चौकी में तहरीर देकर उन्हें उल्टा फंसाने की कोशिश की। कहा कि 22 अक्तूबर की रात पुन: विवाद होने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। आरोप लगाया कि पुलिस ने एक पक्षीय कार्रवाई की, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया। अगले दिन जब बस्ती के लोग कोतवाली पहुंचे तो पुलिस ने महिलाओं और पुरुषों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया और उन्हें जेल भेज दिया।
इस दौरान बसपा के जिलाध्यक्ष विकास कुमार आर्य, एससी/एसटी वैचारिक महासभा की उपाध्यक्ष गीता सिंह, डॉ. भीमराव आंबेडकर जागृति समिति देवरामपुर के अध्यक्ष तेजपाल सिंह, रविदास सेवा समिति कौड़िया के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, जनाधिकार मंच के अध्यक्ष आशा राम, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव मनोज सिंह, मुकेश कुमार, सुभाष, महेश गौतम, सुषमा देवी आदि मौजूद रहे।