कोटद्वार/धुमाकोट/बैजरो। उत्तराखंड की सबसे बड़ी परिवहन कंपनी जीएमओयू की साठ फीसदी से अधिक बसों के चारधाम यात्रा पर चले जाने से पहाड़ के ब्रांच रूटों की परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। हाल यह है कि जिन रूटों पर एक दिन में चार से पांच बस सेवाएं चलती थी, वहां एक सर्विस चलाना भी मुश्किल हो गया है। शादी बारात का सीजन होने के कारण पर्वतीय क्षेत्र की सवारियों को कई किमी पैदल चलकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है।
चारधाम यात्रा से जहां एक ओर यात्रा रूट पर चहलपहल बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर यह यात्रा सीजन पहाड़ के सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए परिवहन व्यवस्था के लिहाज से बड़ा कष्टकारी होता है। कोटद्वार से जीएमओयू की करीब सौ से अधिक दैनिक सेवाएं संचालित होती हैं, लेकिन इन दिनों मुख्य मार्गों के अलावा वह भी ब्रांच रूटों पर सेवाएं नहीं दे पा रही है। लोकल सेवाओं के लिए साठ फीसदी वाहन उपलब्ध कराने का दावा करने वाली कंपनी ने कोटद्वार-धुमाकोट, बीरोंखाल और रिखणीखाल रूट पर अपनी सेवाएं आधी से भी कम कर दी हैं, जिससे पहाड़ के लोग परेशान हैं। बैजरौ, बीरोंखाल, नैनीडांडा और धुमाकोट रूट पर चलने वाली गढ़वाल मोटर यूजर्स को-आपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष अरविंद गुुसाईं का कहना है कि उनके बेड़े में सौ से अधिक बसें हैं, जिसमें से करीब साठ फीसदी बसें चारधाम यात्रा में जाने से लोगों को परेशानी होना स्वाभाविक है।
जीएमओयू के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल का कहना है कि लोकल सेवाओं का संचालन करने का प्रयास किया जा रहा है। कोटद्वार से फतेहपुर-डेरियाखाल के बीच उनके वाहनों के चालान कटने से बस सेवाओं में जरूरी कटौती की गई है। दुगड्डा-रथुवाढाब रूट से धुमाकोट भी बसें भेजी जा रही हैं।
कोटद्वार से मेरठ-दिल्ली रूट पर रोडवेज की आमतौर पर 25 बसें संचालित होती हैं, लेकिन इन दिनों शादी बारात के चलते यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी के चलते पांच से सात बसें अतिरिक्त चलाई जा रही हैं। इसके बाद भी डिमांड बढ़ रही है। रोडवेज के सहायक महाप्रबंधक बीके सैनी कहते हैं कि दिल्ली रूट पर 25 बसों के अलावा चार वातानुकूलित (एसी) बसें भी शुरू कर दी गई हैं।
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