जीआईसी धुमाकोट में पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ गढ़वाली प्रार्थना और समूहगान करते छात्र-छात्र?
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राजकीय आदर्श इंटर कालेज धुमाकोट में लोक वाद्ययंत्रों की धुन पर गढ़वाली प्रार्थना शुरू हो गई है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हुड़का, ढोलक, थाली और हारमोनियम की धुन के बीच ‘भगवती छै बुद्धि तू अवगुणों से तारदी, सर्व बाधा विनाशिनी छै: कमल बीच विराजदी..’ गढ़वाली प्रार्थना और समूहगान की मनमोहक प्रस्तुति दी।
शिक्षा विभाग के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित आदर्श राइंका धुमाकोट में बुधवार को सुबह की गढ़वाली प्रार्थना और समूहगान में विद्यालय के 183 छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और स्टाफ ने प्रतिभाग किया। प्रार्थना और समूहगान की रचना के साथ ही संगीत निर्देशन हिंदी प्रवक्ता महेंद्र ध्यानी विद्यालंकार द्वारा किया गया। हारमोनियम पर गिरीश ध्यानी, ढोलक पर पूर्वांशी ध्यानी, हुड़के पर महेंद्र ध्यानी और थाली पर राहुल रावत ने संगत दी। मुख्य गायन संगीता ध्यानी ने किया और अन्य छात्राओं ने साथ में स्वर दिया। छात्र-छात्राओं ने गढ़वाली समूह गान ‘स्वर्ग से भी स्वाणि च मेरी जन्मभूमि, यक सबी धाणी छन: मेरी जन्मभूमि, यख पहाड़ों कू राजा हिमवंत रैंद, मां गंगा हरियाली आशीष दींद, जो नदियों की राणी च, मेरी जन्मभूमि...’ की सुंदर प्रस्तुति दी।
विद्यालय के प्रधानाचार्य दर्शन कुमार ने बताया कि शिक्षा विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत गढ़वाली प्रार्थना के लिए पौड़ी जिले के दो विद्यालयों का चयन किया है, जिसमें से एक उनका विद्यालय है। इसके लिए डायट चड़ीगांव द्वारा वाद्ययंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। इस मौके पर हरिमोहन रावत, प्रेमसिंह, शेषनाथ यादव, मोहनसिंह बिष्ट, शालू गौतम आदि शिक्षक गण, स्टाफ सदस्य तथा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।