कर्मचारियों के उत्पीड़न और सामग्री गायब होने के आरोपों से घिरी एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रो. आईएस योग ने मेडिकल कालेज प्रशासन पर ही सवाल उठा दिए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2011 से 2014 के बीच कई प्राचार्य बदले, उनसे प्राचार्य आवास की इंवेंटरी (सामग्री सूची) के बारे में क्यों नहीं पूछा गया?
मालूम हो कि श्रीनगर मेडिकल कालेज की कार्यवाहक प्राचार्य रह चुकी प्रो. योग के विरुद्ध उनका विभाग मोर्चा खोले बैठा है। इसके अलावा विगत 6 अक्तूबर को कालेज प्रशासन की ओर से गठित समिति ने प्राचार्य का आवास का निरीक्षण किया था। समिति को काफी सामान गायब मिला। जिस पर कालेज के प्राचार्य प्रो. सीएमएस रावत ने प्रो. योग से स्पष्टीकरण मांगा।
जवाब में प्रो. योग ने स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए प्राचार्य को 3 पृष्ठों का पत्र लिखा है। उनका कहना है कि वह अपने प्राचार्य के कार्यकाल 4 सितंबर 2014 से 10 फरवरी 2016 के बीच प्राचार्य आवास में नहीं रही। वर्ष 2011 में डा. बीएल जागीरदार कालेज के प्राचार्य थे, वह आवास में रहते थे।
उनके जाने के बाद प्रो. पीडी शर्मा व प्रो. अमला रानी दास कार्यवाहक प्राचार्य रहे। क्या पूर्व प्राचार्यों के आते-जाते इंवेंटरी की जांच की गई थी। कहा कि जब उन्होंने प्राचार्य का पदभार संभाला था, तो न किसी ने इंवेंटरी का चार्ज दिया और ना ही भौतिक सत्यापन कराया। उनके कार्यमुक्त होने के बाद शासन ने डीएम पौड़ी को चार्ज दिया।
उन्होंने बायोकेमस्ट्री के एचओडी प्रो. जेबी गोगाई को दैनिक व नैतिक कार्यों की जिम्मेदारी दी। आवास की चाबी वही ले गए। लिहाजा उन्हीं से स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए था। इंवेंटरी के संबंध में जांच चल रही है। जो भी तथ्य आएंगे, उनकी पड़ताल की जाएगी। प्रो. सीएमएस रावत, प्राचार्य मेडिकल कालेज श्रीनगर