दुगड्डा (कोटद्वार)। जिस महान क्रांतिकारी के निशाने का लोहा अंग्रेज सरकार मानती थी, उस आजादी के दीवाने चंद्रशेखर आजाद के निशाने का गवाह रहा स्मृति वृक्ष (कौला का पेड़) 12 मई 2006 धराशायी हो गया था। क्षेत्रीय जनता एवं विभिन्न संगठनों की मांग पर तत्कालीन डीएफओ निशांत वर्मा ने इस पेड़ को टीन शेड में रखवाया। अब यह टीन शेड के नीचे आजादी के आंदोलन की निशानी बनकर रह गया है। आजाद भारत की सरकारों ने इस निशानी की उचित देेखभाल और संरक्षण की जरूरत नहीं समझी।
कोटद्वार-पौड़ी हाईवे पर दुगड्डा से सेंधीखाल जाते समय दो किमी की दूरी पर स्थित आजाद पार्क चंद्रशेखर आजाद के शस्त्र प्रशिक्षण की कहानी खुद ही बयां करता है। 1930 में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद अपने क्रांतिकारी मित्र नाथूपुर निवासी भवानी सिंह रावत के आग्रह पर अपने साथियों रामचंद्र, हजारीलाल, छैल बिहारी और विशंबर दयाल के साथ दुगड्डा आए थे। यहां उन्होंने अंग्रेज सरकार के छिपते हुए शस्त्रों का प्रशिक्षण लिया था। काफी दिनों तक वह दुगड्डा और डाडामंडी के इस क्षेत्र में भूमिगत रहे। यहां से वापसी के दौरान जब साथियों ने आजाद से अपना निशाना दिखाने को कहा तो आजाद ने अपनी पिस्टल से कई राउंड फायर एक पेड़ पर कर किए। सभी सटीक निशाने लगे। आजादी के बाद से यह वृक्ष स्मृति वृक्ष के नाम से जाना जाने लगा। नगर पालिका के निवर्तमान अध्यक्ष दीपक बडोला, ब्लाक प्रमुख सुरेश असवाल ने बताया कि सरकार को स्मृति वृक्ष और आजाद पार्क के संरक्षण के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है।
.
फोटो समाचार
फोटो कैप्शन-दुगड्डा के आजाद पार्क में एक टिन शेड ने नीचे रखे स्मृति वृक्ष के अवशेष।
जारी