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इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रानिक्स कोर्स ठप, सिलाई कटिंग से चल रहा काम

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कोटद्वार। पर्वतीय क्षेत्रों में सरकार युवाओं की रोजगारपरक शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर है, उसका जीता जागता उदाहरण है आईटीआई रिखणीखाल। यहां के युवाओं को पिछले 13 वर्षों से आईटीआई भवन का इंतजार है। यहां युवाओं को इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रानिक्स जैसे महत्वपूर्ण कोर्स कराए जाने थे, लेकिन भवन का निर्माण अटकने से यहां मात्र खानापूर्ति के लिए सिलाई-कटिंग कोर्स संचालित हो रहा है। इसका लाभ क्षेत्रीय युवाओं को नहीं मिल पा रहा है। उन्हें इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रानिक्स से आईटीआई करने के लिए बड़े शहरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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वर्ष 2004 में तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी ने सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए रिखणीखाल में आईटीआई स्वीकृत किया था, लेकिन सरकार आईटीआई भवन के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था करना भूल गई। वर्तमान में आलम यह है कि 13 वर्ष बाद भी आईटीआई का भवन पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है। दूसरी ओर तीसरी मंजिल का निर्माण कार्य रुकने से इसमें कई महत्वपूूर्ण कोर्स संचालित नहीं हो पा रहे हैं।
ग्राम प्रधान सिरवाणा रीना रावत, पूर्व प्रधान सिरवाणा रविंद्र सिंह रावत व ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीनबंधु बलोधी ने सरकार पर क्षेत्र के युवाओं की अनदेेखी का आरोप लगाया। आईटीआई की स्वीकृति के समय इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रानिक्स और सिलाई कटिंग का कोर्स स्वीकृत था, लेकिन भवन के अभाव में मात्र सिलाई कटिंग का कोर्स ही चल रहा है। भवन निर्माण कार्य पूर्ण न होने के चलते यहां के युवाओं को इलेक्ट्रीशियन और इलेक्ट्रानिक्स जैसे कोर्सों के प्रशिक्षण के लिए दुगड्डा, कोटद्वार, सल्ट महादेव, पोखड़ा आदि स्थानों की ओर रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने शीघ्र आईटीआई के भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं होने पर ग्रामीणों के सहयोग से आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
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उधर, आईटीआई के प्रधानाचार्य डीएन नेगी ने बताया कि कुछ वर्षों से भवन निर्माण के लिए बजट नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है। नया इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है। बजट आते ही आईटीआई भवन का शेष कार्य पूरा किया जाएगा।
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