कोटद्वार। नगर निगम विरोध संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं का बुधवार को भी तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन जारी रहा। कार्यकर्ताओं ने कहा कि कम समय मिलने के बावजूद भाबर के 73 गांवों के ग्रामीणों ने 5594 आपत्तियां दर्ज कराकर अपना विरोध जताया है। इसके बाद भी नगर निगम की अधिसूचना रद्द नहीं की तो परिणाम प्रदेश सरकार को स्वयं भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम के विरोध में तीन अप्रैल से समिति के अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण अनशन पर बैठेंगे। साथ ही अनशन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए दो अप्रैल को जनरैली भी निकाली जाएगी।
बुधवार को कोटद्वार तहसील में समिति के अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण की अध्यक्षता में सभी कार्यकर्ता एकत्रित हुए और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि कोटद्वार को नगर निगम बना लो, लेकिन गांवों को मत मिलाओ। ऐसा करने से गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। साथ ही इससे ग्रामीणों की खेतीबाड़ी पर भी असर पड़ेगा। कहा कि भाबर के गांव कोटद्वार नगर निकाय से कहीं अधिक बेहतर हालत में हैं। भाबर के ग्रामीण नगर निगम के बजाय ग्राम पंचायत की व्यवस्थाओं में अधिक खुश है। नगर निगम के विरोध में समिति द्वारा तीन अप्रैल से अनशन किया जाएगा। आंदोलन के लिए संचालन समिति का संयोजक प्रवेंद्र रावत को बनाया गया।
धरनास्थल में सुरेश रावत, हरीश घिडिल्याल, बृजपाल सिंह नेगी, आनंद बल्लभ घिल्डियाल, प्रदीप नेगी, प्रवीण कुमार, मनोज रावत, पुष्कर नेगी, डबल सिंह रावत, दिनेश रावत, देवेंद्र रावत, सतीश जदली, विनोद सती, भारत सिंह रावत व हरीश बिष्ट आदि मौजूद रहे।
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