कोटद्वार। मानसून सत्र में कोटद्वार भाबर को आपदा से बचाने के नाम पर चल रहा खोह और सुखरो नदियों के चैनलाइजेशन के काम में मानकों की घोर अनदेखी की जा रही है। सत्ता की आड़ और प्रशासनिक अधिकारियों की गैरमौजूदगी का भरपूर लाभ खननकारी उठा रहे हैं। जिससे नदी के तटवर्ती इलाकों में दोहरे खतरे की आशंका बन गई है। यहां तक कि खननकारी पुलों से 200 मीटर दूर खनन करने की शर्त का भी जमकर उल्लंघन कर रहे हैं। हाल यह है कि खोह और सुखरो में दिनरात पोकलेन और जेसीबी से मनमाना खनन हो रहा है। पिछले साल तक मशीनों से किए जा रहे चैनलाइजेशन पर हंगामा काटने वाले जनप्रतिनिधियों और विपक्षी दलों की चुप्पी भी सवाल खड़े कर रही है।
आपदा की दृष्टि से कोटद्वार के संवेदनशील स्थानों पर पौड़ी जिला प्रशासन ने जून प्रथम सप्ताह से रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन का काम शुरू कर दिया है। कोटद्वार की खोह और सुखरो नदी में दो सप्ताह से यह कार्य जोरों से चल रहा है। जिसमें चैनलाइजेशन की शर्तों की घोर अनदेखी की जा रही है। नदी के तटवर्ती इलाकों के काश्तकारों का कहना है कि रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन का काम यदि शर्तों के अनुरूप हो तो कोई बात नहीं, लेकिन यहां रात के अंधेरे में भी पोकलेन और जेसीबी गरज रही हैं। प्रशासन की ओर से खोह नदी में चार स्थानों पर और सुखरो नदी में दोनों पुलों के बीच एक स्थान पर खुली बोली के माध्यम से पट्टे आवंटित किए गए हैं। लेकिन खोह नदी में इन चार स्थानों पर दर्जन भर पोकलेन और जेसीबी नदी का सीना छलनी कर रही है।
सबसे अधिक बुरा हाल खोह नदी का है। जहां पुलों से 200 मीटर छोड़कर खनन कार्य कराए जाने की बात बेमानी साबित हो रही है। हाल में बने ग्रास्टनगंज और गूलर पुल की जड़ों तक खननकारी पहुंच गए हैं। चैनलाइजेशन के कार्य का पर्यवेक्षण करने वाला तक कोई नहीं है। कोटद्वार के एसडीएम मनीष कुमार सिंह को केदारनाथ धाम में यात्रा मजिस्ट्रेट बनाकर भेजा गया है, वहीं प्रभारी तहसीलदार डीएस रावत भी उपचार के लिए देहरादून गए हैं। जिसके चलते क्षेत्रवासियों की शिकायत सुनने के लिए तहसील में कोई अधिकारी नहीं है।
लोगों का कहना है कि प्रशासन ने वर्ष 2018 में भी खोह और सुखरो नदियों में रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन के नाम पर पट्टे जारी किए थे। करीब एक माह चले चैनलाइजेशन के काम के लिए जेसीबी और पोकलेन जैसी भारी भरकम मशीनें नदियों में उतारने का भारी विरोध हुआ था, लेकिन इस बार उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
कहां कितने पट्टे आवंटित
1. खोह नदी में सिद्धबली पुल से नीचे 200 मीटर छोड़कर ग्रास्टनगंज निर्माणाधीन पुल से 200 मीटर ऊपर तक खसरा संख्या-46 क्षेत्रफल लगभग 400 मीटर लंबाई, 50 मीटर चौड़ाई और डेढ़ मीटर गहराई।
2. खोह नदी में उत्तर प्रदेश की सीमा स्थित गूलर पुल से दो सौ मीटर छोड़कर ऊपर की ओर खसरा नंबर 9 क, क्षेत्रफल 280 मी. लंबाई, 30 मी. चौड़ाई और डेढ़ मीटर गहराई।
3. खोह नदी में ही गाड़ीघाट पुल से ऊपर और ग्रास्टनगंज निर्माणाधीन पुल से 200 मीटर नीचे की ओर, खसरा नंबर 25, क्षेत्रफल 300 मी. लंबाई-50 मीटर, गहराई डेढ़ मीटर ।
4. खोह नदी में गाड़ीघाट पुल से नीचे गूलर पुल तक, पुलों से दोनों ओर 200 मीटर का क्षेत्र छोड़कर, खसरा नंबर- 97 क, लंबाई-400 मीटर, चौड़ाई 60 मीटर और गहराई डेढ़ मीटर।
5. सुखरो नदी में सिमलचौड़ और बलभद्रपुर में 4.08 हेक्टेयर, खसरा नंबर 103, लंबाई-680 मीटर, चौड़ाई-60 मीटर और गहराई डेढ़ मीटर।