यमकेश्वर। यमकेश्वर ब्लाक के दर्जनों गांवों के लोगों को पिछले तीन वर्षों से बहे हुए पुल के दोबारा बनने का इंतजार है। वन विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते ग्रामीण और स्कूली बच्चे बरसात में नदी के तेज बहाव में खतरे की जद में आवाजाही करने को मजबूर हैं।
वर्ष 1960 में ग्राम सभा सीला में आसपास के गांवों को जोड़ने के लिए वन विभाग ने सप्तरुद्रा नदी पर एक पुल का निर्माण किया था। वर्ष 2014 में आई आपदा में नदी के उफान में पुल बह गया था। इसके कारण आंगनबाड़ी केंद्र सीला, प्राथमिक विद्यालय सीला तथा हाईस्कूल सीला में पढ़ने वाले करीब 90 बच्चों को जान जोखिम में डालकर विद्यालय जाना पड़ता है। करीब एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों को बाजार आने के लिए नदी पार कर जोखिम उठाना पड़ रहा है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य सीला महावीर सिंह, ग्रामीण कांता प्रसाद, गीता रतूड़ी, सुभाष चंद्र व प्रमोद रियाल ने वन विभाग पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि कई बार बीडीसी की बैठकों में मोटर पुल के निर्माण की बात उठाई गई, लेकिन हर बार वन विभाग बहानेबाजी कर रहा है। विगत तीन वर्षों से पुल बनने का इंतजार किया जा रहा है। नदी पार जाने के लिए अन्य साधन नहीं होने के कारण लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।
नदी के अधिक उफान से इन गांवों का कट जाता है संपर्क
सप्तरुद्रा नदी पर बना सीला पुल से यमकेश्वर ब्लाक की ग्राम पंचायत सीला, तिमल्याणी, डाडामंडल, सीला, बनसारी, गाजसेरा, दालमीसेरा, फेड़वा, ठिंगाबांज, काटल, हरसोली, कचुड़ा, कांडई, तिमल्याणी, देवराना तथा किमसार के लोगों को लाभ मिलता है। बरसात में नदी के उफान पर होने से इन गांवों का अन्य क्षेत्रों से संपर्क कट जाता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
यह बात सही है कि शीला पुल के बहने से नदी पार करने में लोगों के लिए खतरा है। पुल बनाने के लिए विभाग के आला अधिकारियों को लिखा गया है। बजट मिलने पर पुल का निर्माण किया जाएगा।
-विरेंद्रपाल, रेंज अधिकारी लालढांग
-फोटो