चंद्रमोहन शुक्ला
कोटद्वार। शहर के गाड़ीघाट क्षेत्र को ग्रास्टनगंज से सीधे जोड़ने और भविष्य में कोटद्वार बाईपास मार्ग निर्माण के उद्देश्य से निर्माणाधीन खोह नदी का मोटर पुल दो साल बनकर तैयार नहीं हो सका है। इस मोटर पुल को गत फरवरी माह में पूरा हो जाना चाहिए था। समय सीमा के भीतर पुल का निर्माण न होने को बजट का अभाव बताया जा रहा है। निर्धारित समय पर पुल निर्माण न होने पर क्षेत्रवासियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। गाड़ीघाट से ग्रास्टनंगज जाने वाले लोगों को नदी में उतरकर आवाजाही करनी पड़ रही है। बरसात में यहां पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो जाता है।
कोटद्वार के गाड़ीघाट से ग्रास्टनंगज के इलाके को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए वर्ष 2015 में तत्कालीन सरकार ने 4.09 करोड़ की लागत से नब्बे मीटर स्पान के मोटर पुल को मंजूरी प्रदान की। धनावंटन की पहली किश्त मिलते ही लोनिवि दुगड्डा ने इस पर तेजी से काम शुरू करते हुए दो पिलर और एबिटमेंट का कार्य पूरा करवा दिया। इस बीच बजट न मिलने के कारण ठेकेदार ने आगे का कार्य कराने से हाथ खड़े कर दिए। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि समय पर पुल का काम हो जाता तो शहर के लोगों को ईदगाह और दशहरा मैदान तक आवाजाही की सुगमता हो जाती। पुलिस के निर्माण से सबसे अधिक फायदा फायर बिग्रेड को होता। उसे शहर में प्रवेश के लिए तीन से चार किमी का चक्कर नहीं काटना पड़ता। ग्रास्टनगंज पुल के निर्माण से पुराने सिद्धबली मार्ग के साथ ही वहां बने कई सरकारी कार्यालयों में आनाजाना भी सुगम हो जाता। बरसात में खोह नदी के उफान पर रहने के कारण यहां से पैदल आवाजाही भी ठप हो जाती है।
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ग्रास्टनगंज पुल को आरसीसी प्री स्टैस तकनीक से बनाया जा रहा है। बजट की कमी के चलते कार्य कुछ दिन के रुका था। ब्रिज मद में मिली धनराशि रिलीज होने के बाद ठेकेदार को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। पुल का करीब 60 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। चार स्लैब डाले जाने हैं। इसी वित्तीय वर्ष में अगले साल मार्च तक पुल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
-अजीत गुसाईं, सहायक अभियंता लोनिवि दुगड्डा।
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