सिंचाई विभाग की एक सौ पंद्रह नहरें बंद होने से मंडल के पौड़ी, चमोली और रुद्रप्रयाग में सब्जियां-फसलें झुलसने लगी हैं। बजट न होने से विभाग इसे सुचारू नहीं कर पा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इन दिनों पहाड़ में तेज गर्मी पड़नी शुरू हो गई है। गर्मी और ऊपर से पानी न मिलने से प्याज, बीन्स और भिंडी समेत विभिन्न सब्जियों की फसलें झुलसने लगी हैं। धान की अगेती फसल की बुआई शुरू हो गई है। इन सभी फसलों के लिए इन दिनों खेतों में पानी की जरूरत पड़ रही है। जानकारों के अनुसार, जून महीने तक खेतों में फसलों को समय-समय पर पानी की जरूरत पड़ती रहेगी। ऐसे समय में सिंचाई विभाग की कई नहरें किसानों का साथ नहीं दे पा रही हैं।
गढ़वाल मंडल के पौड़ी, चमोली और रुद्रप्रयाग जनपदों में सिंचाई विभाग की 694 नहरें हैं। इनमें पौड़ी में 302, रुद्रप्रयाग और चमोली 196-196 नहरें हैं। तीन जिलों में विभाग की इन नहरों में से पौड़ी जिले की रैदुल, अयाल, केवर्स, दियूसा, व्यसाघाट नहर समेत 115 नहरें पूरी तरह बंद पड़ी हैं। इनमें ज्यादातर नहरें पिछले दो साल बंद हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2013-14 में आई दैवी आपदा की चपेट में आने से ये नहरें क्षतिग्रस्त हो गई थी। इनको सुचारू करने के लिए विभाग की ओर से शासन बजट की मांग की गई थी। शासन से बजट न मिल पाने के कारण विभाग इन्हें ठीक नहीं कर पाया।
पौड़ी जिले में बंद पड़ी हैं सर्वाधिक 59 नहरें
पौड़ी। पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग जनपद में बंद पड़ी नहरों में सर्वाधिक 59 नहरें पौड़ी जिले में बंद है। इनमें बीस नहरें दुगड्डा डिवीजन की और 39 श्रीनगर डिवीजन की हैं। रुद्रप्रयाग जनपद में 25 और चमोली जिले में 29 नहरें बंद हैं।
गढ़वाल मंडल में क्षतिग्रस्त होने से बंद नहरों को सुचारू करने के लिए नाबार्ड को प्रस्ताव भेजे गए है। नाबार्ड से बजट मिलते ही इन्हें ठीक कराया जाएगा। विभाग की ओर से इन्हें सुचारू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- अजय वर्मा, मुख्य अभियंता राजकीय सिंचाई गढ़वाल मंडल पौड़ी
सदणिंया गांव में गहराया पानी का संकट
पौड़ी। द्वारीखाल ब्लाक के सदणिंया गांव में पेयजल आपूर्ति न होने से जल संकट गहरा गया है। सदणिंया गांव निवासी राज्य निर्माण आंदोलनकारी विक्रम सिंह रावत, त्रिलोक सिंह, आशीष कुमार और सत्यपाल आदि ने बताया कि इस गांव में तीस परिवार रह रहे हैं। किसी को भी पानी नहीं मिल पा रहा है। गांव में पानी की आपूर्ति के लिए बखरोड़ी के समीप के गदेरे से पेयजल योजना बनी है। पिछली बरसात से इस योजना के स्रोत में काफी मलबा आ गया जिससे योजना का टैंक क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने जल संस्थान से योजना के स्रोत में आए मलबे को साफ करने, क्षतिग्रस्त टैंक को ठीक करने, योजना को सुचारू करने की मांग की है। कहा कि गांव में पेयजल आपूर्ति सुचारू न होने की दशा में आंदोलन किया जाएगा।