उत्तराखंड के केदारघाटी में आई आपदा को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। पीड़ितों तक कोई मदद पहुंचना तो दूर, जो अधिकारी-कर्मचारी पीड़ितों की मदद को भेजे गए हैं, उन्हें भी बुनियादी जरूरत की चीजें नहीं मुहैया हो रही हैं।
जो अधिकारी-कर्मचारी जहां फंस गया, पिछले 14 दिन से वहीं बना हुआ है। तैनाती का रोस्टर नहीं बनाने से घाटी में भेजे गए अधिकारी-कर्मचारी खुद को सजा मिलने जैसा महसूस करने लगे हैं। पीड़ितों के साथ ही अब इन राहत कार्मियों के भी भूखे रहने और ठंड में मरने की नौबत बन आई है।
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सैकड़ों पुलिसकर्मी, राजस्व और प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी पिछले 14 दिन से केदारघाटी में राहत कार्यों में जुटे हैं। एनडीआरएफ-आईटीबीपी के साथ कंधे से कंधा मिलकर मदद की। लेकिन अब इन्हें ही मदद की दरकार है। शासन और सरकार की बेरुखी से उनका जज्बा पिघलने लगा है।
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इनकी जरूरत की बुनियादी चीजें तक इन्हें नहीं मुहैया कराया रहा है। जिला अधिकारी इनके लिए सामान भेजना भी चाहे तो उसके पास संसाधन नहीं है। राहत कार्यों में लगाए गए हेलीकाप्टर कहां उड़ रहे हैं और किसके आदेश-निर्देश पर चल रहे हैं, यह किसी को पता नहीं।
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एयरफोर्स-आर्मी के हेलीकाप्टर जब तक चलते रहे मदद मिलती रही। अब यह सुविधा भी खत्म हो गई। आपदा के बाद से पूरी केदारघाटी में बिजली नहीं है। कैंप उजड़ते मुसीबत टूट पड़ी है।
सूत्रों के मुताबिक केदारनाथ धाम में पहुंचे पुलिस कर्मियों और राजस्व विभाग के अधिकारियों के पास पर्याप्त मात्रा में अपना तंबू तक नहीं है। भोजन आदि के लिए भी राशन की कमी बताई जा रही है। मौसम खराब रहने से हेलीकाप्टर से पर्याप्त राशन और भोजन बनाने के लिए अन्य जरूरी सामान तक भेजना मुश्किल हो रहा है।
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राहत कार्य के संचालन का केंद्र बने गुप्तकाशी के देवशाल हेलीपैड पर स्थित चारधाम कैंप के टेंट यहां तैनात प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के निवास हैं। राहत शिविर बन चुके उसी के रेस्टोरेंट में ही उनका नाश्ता-भोजन है। पुलिस कर्मियों से लेकर नोडल अधिकारी और एसडीएम तक के लिए यही रेस्टोरेंट ही पेट भरने का केंद्र है।
वहीं पुलिस के बड़े अफसर एक-दो दिन यहां वक्त बिताने के बाद मौका हाथ लगते ही हेलीकाप्टर से देहरादून निकल जाते हैं। रि-फ्रेश होते हैं। घर-परिवार से मिलते हैं और फिर किसी हेलीकाप्टर से आ जाते हैं।
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लेकिन पोस्टमार्टम और दाह संस्कार के अलावा वहां की साफ-सफाई के लिए भेजे गए कर्मचारियों की लगातार वहीं बने रहने से अब हालत बिगड़ने लगी है। तैनाती का रोस्टर नहीं बनाने से घाटी में भेजे गए अधिकारी-कर्मचारी खुद को सजा मिलने जैसा महसूस करने लगे हैं।
मलबे से शव निकालना हुआ दुश्वार
विपरीत मौसम और विषम परिस्थिति की वजह से केदारनाथ धाम में मलबे से शवों को निकालने का काम मुश्किल हो गया है। धाम में लगातार बारिश हो रही है। शव अब सड़ने लगे हैं। छूने भर से मांस के लोथड़े हाथ में आ जा रहे हैं। उनकी दुर्गंध से पुलिस के भी पांव उखड़ रहे हैं। जहां देखो वहीं शव पड़े हुए हैं।
भवनों के अंदर, मलबे में शव दबे हुए हैं। इन्हें निकालने में भवनों के ढहने का खतरा है। इसके अलावा कई शव खतरनाक चट्टानों में फंसे हुए हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस अब शासन से शव निकालने के लिए स्पेशल फोर्स की डिमांड कर रही है।