आपदा के दौरान प्रभावितों के लिए उत्कृष्ट कार्य करनी वाली आईटीबीपी की 12वीं वाहिनीं भविष्य के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट को और मजबूत करने जा रही है।
टीमें तैनात करने की तैयारी
बरसात से पूर्व संवेदनशील गांवों में बल टीमें तैनात करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आईटीबीपी परिसर मातली में जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जून माह में आई प्रलयंकारी आपदा ने पूरे देश को झकझोर कर दिया था।
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चार धामों में हजारों यात्री फंस गए थे, लेकिन सेना और आईटीबीपी के जवानों ने अपनी जान पर खेलकर हजारों लोगों का जीवन बचाया। अलग-थलग पड़े गांवों में रसद पहुंचाने के साथ ही सामुदायिक कार्यों में भी सहयोग किया था।
अब आईटीबीपी 12वीं वाहिनीं मातली अपने आपदा प्रबंधन को और मजबूत करने जा रही है। बल जिले के प्रभावित गांवों में बरसात से पूर्व 10-10 प्रशिक्षित जवानों की टीमें तैनात करने की योजना बना रहा है।
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इसके लिए आटीबीपी कैंप मातली में जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जवानों को रीवर क्रोसिंग, रॉ क्लाइबिंग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
गंगा घाटी में 5000 यात्रियों को बचाया
जून की आपदा के दौरान गंगोत्री राजमार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से गंगोत्री घाटी में हजारों तीर्थयात्री फंस गए थे।
आईटीबीपी ने पैदल रास्तों का निर्माण कर पांच हजार से अधिक यात्रियों को भटवाड़ी, मनेरी और मातली हैलीपैड तक सुरक्षित पहुंचाया। भूखे-प्यासे यात्रियों के लिए कैंप परिसर में भंडारा भी लगाया, जिसमें प्रतिदिन 500 से अधिक यात्रियों ने भोजन किया।
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