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छोटा कैलास यात्रा पर सेना का दल भी जाएगा

Thu, 05 May 2016 03:54 PM IST
दीपक उप्रेती/ अमर उजाला, पिथौरागढ़
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army - फोटो : file photo
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छोटा कैलास यात्रा पर इस बार एक दल भारतीय सेना का भी जाएगा। सेना के जवानों ने इसके लिए पंजीकरण करा लिया है। इस बार यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ने की उम्मीद है।
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पिछले साल 320 यात्रियों ने छोटा कैलास के दर्शन किए थे। इस बार यह संख्या 400 तक पहुंचेगी। अभी तक 200 यात्रियों ने पंजीकरण करा लिया है। इनमें ज्यादातर लोग गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा के हैं। यात्रा के लिए ऑनलाइन बुकिंग हो रही है।

कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया छोटा कैलास की यात्रा ज्यादा सुगम है और आवेदन प्रक्रिया भी आसान है। इसके लिए कैलास मानसरोवर यात्रा की तरह ज्यादा औपचारिकताएं नहीं करनी पड़तीं। भारतीय क्षेत्र में स्थित इस तीर्थस्थान पर जाने में खर्च भी कम आता है।
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दिल्ली से चलकर वापस दिल्ली पहुंचने मात्र 20 दिन का समय लगता है। जहां तक यात्रा मार्ग में सुविधाओं का सवाल है छोटा कैलास यात्रियों को पड़ावों में वैसी ही सुविधाएं मिलती हैं जैसी कैलास मानसरोवर यात्रियों को दी जाती है। इस यात्रा को भी कैलास मानसरोवर की यात्रा की तरह पवित्र माना जाता है। यात्री सात्विक भोजन करते हैं। छोटा कैलास में पार्वती सरोवर में स्नान होता है और छोटा कैलास पर्वत की परिक्रमा होती है।

1991 से शुरू हुई छोटा कैलास यात्रा
छोटा कैलास यात्रा 1991 से शुरू हुई। उसके बाद यह नियमित संचालित होती है, लेकिन दलों की संख्या निश्चित नहीं रहती। किसी वर्ष मात्र सात ही दल यात्रा में गए तो किसी साल यह संख्या 15 तक भी पहुंच जाती है। छोटा कैलास के दलों में यात्रियों की संख्या को सीमित रखा जाता है। इनमें 20 से लेकर 40 तक ही यात्री होते हैं।

छोटा कैलास का इस तरह रहेगा यात्रा रूट
छोटा कैलास यात्री आधार शिविर धारचूला से चलकर प्रथम पड़ाव सिर्खा पहुंचते हैं। उसके बाद गाला, बूंदी, गुंजी होते हुए नाभीढांग जाते हैं। नाभीढांग से ओम पर्वत के दर्शन करने के बाद दल वापस गुंजी आता है। गुंजी से कुटी, ज्योलिंगकांग होते हुए छोटा कैलास पहुंचते हैं और दर्शन करने के बाद रात्रि विश्राम के लिए कुटी आते हैं। वापसी में इनका रास्ता गुंजी, बूंदी और धारचूला रहता है।
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