फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूएस नगर में टैक्स बचाने के लिए ऐसे होता है 'खेल'

Thu, 05 May 2016 03:48 PM IST
चंदन बंगारी/ अमर उजाला, काशीपुर
विज्ञापन
टैक्स - फोटो : Demo
विज्ञापन
तराई में प्रमुखता से खेती और खनन कार्य होता है। दोनों ही कार्यों में बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्राली का प्रयोग किया जाता है।
विज्ञापन

 
निगम से लकड़ी, फैक्ट्रियों से माल सहित अन्य कारोबारों में भी सामान ढोया जाता है। लेकिन अचरज की बात है कि परिवहन विभाग कार्यालय में ट्रैक्टर तो 28 हजार रजिस्टर्ड हैं, मगर ट्राली की संख्या महज 2 हजार ही हैं। सारा खेल टैक्स से बचने के लिए खेला जाता है। विभाग की चेकिंग में ऐसे कई मामले पकड़े जा चुके हैं। एक साल के भीतर चेकिंग में पकड़े 157 ट्रैक्टर ट्रालियों का चालान हो चुका है।

तराई की सड़कों, खेतों और नदियों में जहां नजर दौड़ाएंगे, वहां ट्रैक्टर ट्रालियां दौड़ती नजर आएंगी। अधिकांश ट्रालियों का प्रयोग उपखनिज ढोने में किया जाता है। लेकिन ज्यादातर ट्रालियों में नंबर नहीं होता है। जिसका कारण उनका रजिस्ट्रेशन नहीं होना है। विभाग से मिले आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। काशीपुर एआरटीओ कार्यालय में 2151 ट्रैक्टर रजिस्टर्ड हैं जबकि ट्रालियों की संख्या 714 है। इनमें से केवल एक ही ट्राली कृषि कार्य में रजिस्टर्ड है।
विज्ञापन


रुद्रपुर एआरटीओ कार्यालय में 26081 ट्रैक्टर रजिस्टर्ड हैं जबकि ट्राली का आंकड़ा महज 1162 है। जिले में बाजपुर, सितारगंज, कुंडा, आईटीआई, सितारगंज, शांतिपुरी सहित अनेक क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में खनन कार्य होता है। खनिज ढोने के लिए डंपर, ट्रकों के साथ ही काफी ट्रैक्टर ट्रालियों का प्रयोग भी किया जाता है। जानकारों के मुताबिक ट्रैक्टर को कृषि कार्य में मानते हुए टैक्स नहीं लिया जाता है।

जबकि व्यवसायिक में पंजीकृत ट्राली से हर तीन महीने में 1840 रुपये का टैक्स विभाग लेता है। असल में टैक्स बचाने को लेकर सारा खेल होता है। लोग ट्रैक्टर के साथ ट्राली खरीदते हैं और उससे मुनाफा भी कमाते हैं लेकिन टैक्स से बचने को उसका रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं। विभाग के आंकड़ों से इस मंशा की भी पुष्टि हो जाती है।

तो ऐसे पकड़ में नहीं आतीं ट्रालियां
काशीपुर में वैध के साथ ही अवैध खनन में भी ट्रैक्टर ट्रालियों का प्रयोग बड़े पैमाने पर होता है। छापेमारी में ट्रालियों के पकड़े जाने से इसकी पुष्टि भी होती है। नदी से उपखनिज लाने वाली ट्रैक्टर ट्राली के चालक स्टॉक तक माल पहुंचाने में मुख्य मार्गों का इस्तेमाल काफी कम करते हैं। हालांकि जो रजिस्टर्ड हैं, वो जरूर मार्गों में चलते रहते हैं। जिस वजह से यह बहुत कम ही परिवहन विभाग की पकड़ में आते हैं। हालांकि पुलिस भी अधिकांश ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन तो जांचती है, मगर ट्राली का नहीं। जिस वजह से ये वाहन बच निकलते हैं।

ओवरलोडिंग से होती हैं दुर्घटनाएं
काशीपुर में कई सड़क हादसों का कारण ट्रैक्टर ट्राली रही हैं। कई बार ओवर लोडेड या तेज गति होने के कारण चालक स्टेयरिंग से नियंत्रण खो बैठते हैं। जिस वजह से हादसे घटते हैं और लोग घायल या जान गंवा बैठते हैं। कई बार तो खनन क्षेत्रों में ट्रैक्टर ट्रालियों के पलटने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। वहीं ट्रालियों में इंडीकेटर तो नहीं होता है। लेकिन चालकों को रेडियम लगाने के निर्देश दिए जाते हैं। जिससे रात में पीछे से आ रहे वाहन चालकों को ट्राली होने का पता चल जाए। लेकिन चालक इस पर ध्यान नहीं देते हैं, जिस वजह से कई बार हादसे हो जाते हैं।

बिना रजिस्ट्रेशन के ट्राली का प्रयोग करना है गलत
एआरटीओ (प्रशासन) रुद्रपुर नंदकिशोर कहते हैं कि लोग जानकारी के अभाव में ट्रालियों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं जबकि खेतों में काम कर रही ट्रालियों का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। जो लोग बिना पंजीकरण कराए ट्राली का इस्तेमाल गैर कृषि कार्यों के लिए कर रहे हैं वो गलत है। पकड़े जाने पर ऐसे वाहन सीज करने के साथ ही भारी भरकम जुर्माने की रकम वसूली जाएगी।
विज्ञापन


एआरटीओ (प्रशासन) काशीपुर अनीता चंद कहती हैं कि आंकड़ों में संख्या कम हैं। गांवों में लोग एक दूसरे की ट्राली मांगकर प्रयोग करते हैं, इसलिए वे ट्राली नहीं खरीदते हैं। लेकिन जिनके पास ट्राली है, उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। समय-समय पर चेकिंग में ऐसे वाहन पकड़े जाने पर जुर्माना भी वसूला जाता है। एक साल में 66 ट्रैक्टर ट्रालियों का चालान किया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें