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ऊर्जा प्रदेश को इस सर्दी लगेगी कड़ाके की 'ठंड'

Tue, 29 Oct 2013 08:52 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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ऊर्जा प्रदेश होने के बावजूद उत्तराखंड को सर्दी के मौसम में इस बार भी लोगों को बिजली संकट से जूझना पड़ेगा। कारण यह है कि तापमान गिरते ही जल विद्युत परियोजनाओं से बिजली उत्पादन कम हो गया है। दिसंबर और जनवरी में स्थिति और खराब हो सकती है।
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फिलहाल प्रदेश में रोजाना दो करोड़ 90 लाख यूनिट बिजली की जरूरत है। सर्दी में मांग में 30 से 40 लाख यूनिट का इजाफा होता है। जबकि, उत्पादन एक करोड़ 60 लाख यूनिट से गिरकर 90 लाख यूनिट रह गया है।

बिजली संकट तय
दिसंबर आते-आते यह आंकड़ा 50 लाख यूनिट तक सिमट जाएगा। ऐसे में बिजली संकट तय है। सेंट्रल पुल से प्रदेश को करीब एक करोड़ यूनिट बिजली ही मिल पाती है। वहीं, ऊर्जा निगम रोजाना 45 लाख यूनिट बिजली खरीद रहा है। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर को कम करने के लिए इस बार भी कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई है। ऐसे में सर्दी के दौरान बिजली कटौती के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।
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नदियों में पानी कम होने से परेशानी
सर्दियों के दौरान नदियों में जल प्रवाह कम होने से जल विद्युत परियोजनाओं को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। पानी कम होने पर परियोजनाओं की टरबाइन नहीं चल पाती, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। इस स्थिति में फरवरी के बाद ही सुधार देखने को मिलता है।

4220 गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल
ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक एसएस यादव ने दावा किया है कि आपदा प्रभावित 4220 गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई। जून में आई आपदा के दौरान 4222 गांवों में आपूर्ति बाधित हुई थी। उत्तरकाशी में भटवारी ब्लाक के दो गांवों में आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा निगम के स्टोर में पर्याप्त उपकरण उपलब्ध है।

फिलहाल 45 लाख यूनिट बिजली खरीदी जा रही है। अतिरिक्त बिजली की भी व्यवस्था की जा रही है, जिससे दिसंबर और जनवरी में संकट की स्थिति न हो। -एसएस यादव, प्रबंध निदेशक ऊर्जा निगम
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