यूपी के मुजफ्फरनगर में कवाल कांड के बाद से दो समुदायों में नफरत की चिंगारी भड़की हुई है तो उत्तराखंड के सीमावर्ती जिले हरिद्वार में हिंदू और मुस्लिम मिलकर हरिकथा करा रहे हैं।
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धर्म के नाम पर मारकाट करने वालों को हरकी पैड़ी और कलियर शरीफ की धरती (हरिद्वार) के लोगों से सीख लेनी चाहिए। हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम में दो सितंबर से प्रख्यात कथावाचक विजय कौशल महाराज रामकथा पर प्रवचन कर रहे हैं। कथा के लिए जो निमंत्रण पत्र छपवाए गए हैं, उनमें सहयोगी के तौर पर मुस्लिम समाज के 10 लोगों के नाम भी छापे गए हैं।
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इनमें शहर के पार्षद, पूर्व सभासद और बुजुर्ग शामिल हैं। श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ समिति हरिद्वार के पदाधिकारियों ने बताया कि कई मुस्लिमों ने रामकथा के लिए चंदा तक दिया। टेंट, साउंड और सीटिंग व्यवस्था में भी मुस्लिम समाज के कई लोग जी-जान से जुटे रहे। रामकथा में किसी भी धर्म का व्यक्ति आकर प्रवचन सुन सकता है।
सबके बैठने के लिए समान व्यवस्था की गई है। श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ समिति हरिद्वार के प्रचार प्रमुख राकेश अग्रवाल के मुताबिक रामकथा से संदेश दिया जा रहा है कि भगवान श्रीराम के आदर्श और उपदेश किसी धर्म और वर्ग विशेष के लिए नहीं हैं। यह मानवमात्र के कल्याण के लिए है।
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रामराज्य की जो कल्पना की जाती है, उसमें पूरे मानव समाज की भलाई की कामना की गई है। किसी की अकाल मृत्यु न हो, इसके लिए भी प्रार्थना की जा रही है।
खुद भूखे रहे, कांवड़ियों की सेवा की
हरिद्वार में कांवड़ मेला और रमजान का महीना साथ-साथ चले। लेकिन, कहीं पर तनाव जैसी बात नहीं आई। ज्वालापुर के कई मुस्लिमों ने रमजान में खुद भूखे रहते हुए कांवड़ियों के खाने-पीने की व्यवस्था की। देश-दुनिया के लिए यह किसी मिसाल से कम नहीं है।
ईद की तैयारियों में जुटे रहे हिंदू
दोस्ती की गाड़ी दो पहियों पर चलती है। हरिद्वार के हिंदू समाज ने रमजान और ईद में मुस्लिम भाइयों का साथ दिया। कांवड़ मेले के दौरान जो रमजान के जुमे पड़े, उन पर कांवड़ियों का रुट बदल दिया गया। लेकिन कहीं किसी ने कोई आपत्ति नहीं की। ईद की तैयारियों में हिंदुओं ने मुस्लिम भाईयों का पूरा साथ दिया।
कहा जाता है कि धर्म मां के समान है। जो अपनी मां से प्यार करते हैं। वह दूसरों की मां का अपमान नहीं कर सकते। धर्म लड़ना नहीं सिखाता, मिलकर साथ चलने की सीख देता है। पर्व-त्योहार मिलकर मनाने से एक-दूसरे को जानने-समझने का मौका मिलता है।
- मनव्वर कुरैशी, समाजसेवी, ज्वालापुर
धर्म के नाम पर मारकाट कहीं भी उचित नहीं है। झगड़े-फसाद से किसी का भला नहीं हो सकता। आखिर सभी को साथ मिलकर रहना है। धर्म के नाम पर लड़ने वालों का मुखौटा उतारा जाना चाहिए। आम आदमी को समझना होगा कि साथ मिलकर रहने में ही भलाई है।
- डा. प्रदीप जोशी, ज्योतिषाचार्य कनखल
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