साइबर क्राइम का शिकार लोगों को मुकदमा दर्ज कराने के लिए अभी और भटकना पडे़गा। 14 माह बाद तय नहीं हो पाया है कि प्रदेश के एक मात्र साइबर थाने की सुनवाई कौन से कोर्ट में होगी। लंबे समय मंथन के बाद शासन ने यह फाइल हाईकोर्ट को भेज दी है, जहां से कोर्ट का निर्धारण हो पाएगा।
सूबे का पहला साइबर थाना खोलने में अफसरों से लेकर सरकार तक जिस तरह की प्राथमिकता दिखाई थी, वो वक्त के साथ बदल गई। एसटीएफ के एसएसपी रहते हुए डॉ सदानंद दाते ने रातों-रात साइबर थाने को तैयार कराया था। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने व्यक्तिगत दिलचस्पी दिखाते हुए 25 मार्च 2015 को रात के अंधेरे में ही थाने का उद्घाटन किया था।
उस समय साइबर अपराध के उन्मूलन के बडे़ दावे ठोंके गए थे। उम्मीद जगी थी कि अब साइबर अपराध का शिकार लोगों को जल्द न्याय मिलेगा, लेकिन हुआ उसके विपरीत। पुलिस थानों में उनकी सुनी नहीं गई और साइबर थाने ने यह कहकर निराश किया कि अभी मुकदमा दर्ज नहीं हो सकता।