स्टिंग के बहाने सीबीआई के खौफ से कांग्रेस को दोफाड़ करने की व्यूह रचना का पता फ्लोर पर चलेगा। पहले स्टिंग से बैकफुट पर आई कांग्रेस दूसरे स्टिंग के बाद डगमगाती नहीं दिख रही। ऐसे में अगर कांग्रेस अपनी एकजुटता को फ्लोर तक ले जाने में कामयाब हो भी गई तो सरकार की मुश्किलें कम नहीं होंगी। उधर, सीबीआई जांच कांग्रेस बागियों और प्रदेश भाजपा को भविष्य में सियासी संजीवनी का काम करने वाली है।
फ्लोर टेस्ट को ध्यान में रखकर कांग्रेस के बागियों के स्टिंग का गणित भाजपा के लिए कितना कारगर होगा, इसका पता 10 मई को सदन में चलेगा। पहले स्टिंग से पूर्व सीएम हरीश रावत तो दूसरा स्टिंग सामने आने के बाद एक दर्जन और कांग्रेस विधायक सीबीआई के रडार पर लाकर बागियों ने बड़ा दांव खेला।
माना जा रहा था कि सीबीआई तुरंत हरकत में आएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पूर्व सीएम हरीश रावत सीबीआई के पूछताछ में शामिल होने के नोटिस पर भी दिल्ली नहीं गए। उधर, सीबीआई का मामले में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाने से कांग्रेस के लिए राहत भरा रहा है। स्टिंग के आधार पर सीबीआई का खौफ फ्लोर फिलहाल कांग्रेस के फ्लोर मैनेजमेंट पर भारी पड़ता नहीं दिख रहा है।