देववाणी परोपकार मिशन की ओर से संस्कृति संवर्द्धन के लिए कार्यशाला में बड़ा अखाड़ा उदासीन के महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद ने कहा कि भारतीय संस्कृति अति प्राचीन और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। प्रदेश की अद्वितीय संस्कृति का संरक्षण सबका दायित्व है।
उत्तराखंड संस्कृति निदेशालय के सहयोग से श्री चेतन ज्योतनि आश्रम में बृहस्पतिवार को स्वामी ऋषिश्वरानंद, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, बाबा हठयोगी, स्वामी आनंद ब्रह्मचारी और शिवम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का उद्घाटन किया। बाबा हठयोगी महाराज ने कहा कि देवभूमि की संस्कृति के अध्ययन से पता चलता है कि यहां देवता निवास करते हैं। इसीलिए उत्तराखंड को देवभूमि कहा गया है। स्वामी आनंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि अपनी संस्कृति को सहेजते हुए युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के महत्व से अवगत कराना होगा।
अध्यक्षता करते हुए स्वामी ऋषिश्वरानंद ने कहा कि प्रदेश की संस्कृति को बचाने में देववाणी परोपकार मिशन का महत्वपूर्ण योगदान कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की संस्कृति हिमालय की तरह अमिट है। एबीवीपी के प्रदेश सह कोषाध्यक्ष डॉ. नवीन पंत ने कहा कि संस्कृति के संरक्षण के साथ अपनी बोली भाषा का संरक्षण भी जरूरी है। देववाणी परोपकार मिशन के अध्यक्ष ईश्वर सुयाल ने कहा कि संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना ही मिशन का उद्देश्य है। संस्कृत छात्रों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। कलाकरों को स्मृति चिन्ह और नकद पुरस्कार भेंटकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्रभुदयाल शर्मा, सर्वेश तिवारी, दीपक उपाध्याय, कमलेश्वरी, दीपक भट्ट, हर्ष कालरा, मन्नू शर्मा, पूजा वर्मा, पूनम चौहान, सुरभि, ज्योति, निशा, आरूषि, संतोषी, कमल पंचोली, रजत, नवीन सुयाल, राकेश आदि मौजूद रहे।