महिला अस्पताल की व्यवस्थाएं फिर से पटरी से उतरती नजर आ रही हैं। पहले से ही डाक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल की सीएमएस सात दिन के अवकाश पर चलीं गई है। अब अस्पताल केवल दो डाक्टरों के भरोसे रह गया है। शुक्रवार को अस्पताल में की ओपीडी में एक ही महिला चिकित्सक होने से गर्भवती महिलाओं को अपनी बारी के लिए 2 से 3 घंटे का इंतजार करना पड़ा।
शुक्रवार से महिला अस्पताल की प्रमुख डाक्टर भवानी पाल सात दिन के अवकाश पर चलीं गई है। उनके जाने के बाद अस्पताल में केवल दो डाक्टर बाल रोग विशेषज्ञ डा. मीता श्रीवास्तव और स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. अल्पना खरे ही रह गई हैं। इससे अस्पताल में प्रतिदिन 200 से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच और 10 से 12 डिलीवरी करवाना मुश्किल हो गया है। शुक्रवार को अस्पताल में मात्र एक ओपीडी चलने से परामर्श एवं इलाज को पहुंची गर्भवतियों को लम्बा इंतजार करना पड़ा। सुबह 10 बजे तक पहुंची गर्भवती महिलाओं को अपनी बारी का इंतजार करना मुश्किल हो गया।
बोलीं गर्भवती महिलाएं
श्यामपुर कांगड़ी से पहुंची सुनीता देवी ने बताया कि वो सुबह 10 बजे अस्पताल में पहुंच गई थी। 12 बजे तक नंबर नहीं आया। ज्वालापुर निवासी रश्मि ने बताया कि उसे लाइन में लगे दो घंटे हो गए। गेट पर लौटती मिले महिला के पति सुनील अरोड़ा ने बताया कि घंटे भर इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आया और अभी भी घंटेेे भर तक उम्मीद नहीं। इससे तो वे किसी निजी अस्पताल में जांच करा लेंगे।
नहीं मिले अस्पताल को डाक्टर
शासन से महिला अस्पताल में पिछले तीन महीने पहले दो डाक्टर भेजने को आदेश जारी हुए थे। जिसमें एक डाक्टर देहरादून से और दूसरे जिला अस्पताल से बाल रोग विशेषज्ञ डा. संदीप निगम को भेजने के निर्देश हुए थे। लेकिन जिला अस्पताल में डा. निगम के स्थान पर भेजे गए डाक्टर देहरादून से नहीं आए तो उन्हें रिलीव नहीं किया गया।
शासन की ओर से डाक्टरों के तबादले का पालन सही तरीके से न होने पर यह अव्यवस्था हो रही है। तबादला प्रक्रिया में कुछ बदलाव होने की जरूरत है। महिला अस्पताल में उपयुक्त डाक्टर उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक बैठक में बात उठाई जाती है और उच्च अधिकारियों के द्वारा आश्वासन मिलता है। अब फिर से महिला अस्पताल की समस्या के बारे में शासन को अवगत कराते हुए लिखित में भेजकर डाक्टर नियुक्त करने की मांग उठाई जाएगी।
डा. बीएस जंगपांगी, सीएमओ, हरिद्वार।