महिला और जिला अस्पताल एक ही परिसर में होंगे। इन दोनों के भवनों को तोड़कर एक नई बिल्डिंग बनाई जाएगी। 150 बेड का एक नया संयुक्त अस्पताल बनेगा। इससे मरीजों को सुविधा मिलेगी। वह सभी डॉक्टरों की सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। बुधवार को इस बाबत स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने निरीक्षण किया।
उन्होंने दोनों अस्पतालों की के भवनों को देखा। दोनों अस्पतालों के परिसर को एक करने की प्रक्रिया के बारे में भी वार्ता की। निरीक्षण के उपरांत उन्होंने दोनों अस्पतालों के सीएमएस, डॉक्टरों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता कर कार्ययोजना को अमली जामा पहनाने के लिए कहा। बताया कि संयुक्त अस्पताल के लिए दिल्ली के एनएचएम के अधिकारी भी निरीक्षण कर चुके हैं। योजना के अमली जामा पहनने पर दोनों अस्पतालों की सुविधाएं जरूरतमंद मरीज को एक परिसर में मिल सकेगी।
पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड का मिलेगा लाभ
महिला और जिला अस्पताल के एक होने से एक पैथोलॉजी से ही काम चल सकेगा। फिलहाल महिला अस्पताल की पैथोलॉजी में जांच की अधिकांश सुविधाएं नहीं है। इससे गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए जिला अस्पताल आना पड़ता था। इसके अलावा महिला अस्पताल की सबसे बड़ी जरूरत अल्ट्रासाउंड केंद्र की है। जिला अस्पताल से जुड़ जाने पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। इससे महिलाओं को अन्य अस्पतालों में या केंद्रों पर नहीं भटकना पड़ेगा।
कार्यालयों के एक होने से बचेंगे कई कक्ष
दोनों अस्पतालों के एक होने से प्रशासनिक कार्य एक छत के नीचे होने से कई कक्षों की बचत होगी। उन कक्षों का मरीज हित में उपयोग किया जा सकेगा।
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साफ सफाई न मिलने पर डीजी हेल्थ नाराज
स्वास्थ्य महानिदेशक ने निरीक्षण के साथ देखा कि जिला अस्पताल में साफ सफाई की स्थिति अच्छी नहीं है, जिस पर उन्होंने सीएमएस से नाराजगी जताई। उन्होंने ओपीडी कक्षों में भी साफ सफाई पर फोकस करने को कहा। उन्होंने भर्ती मरीजों से वार्ता की और मिल रही सुविधाओं के बारे में जाना। उन्होंने मरीजों से जांच और दवा मिलने की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने अस्पतालों के डॉक्टरों एवं अन्य स्टाफ के साथ मीटिंग कर समय से ओपीडी खोलकर भर्ती मरीजों की देखभाल करने को कहा। मौके पर जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. शिखा जंगपांगी, डॉ. शशिकांत, डॉ. संदीप निगम, डॉ. शिवम पाठक, डॉ. चंदन मिश्रा, डॉ. सुब्रत अरोड़ा आदि शामिल रहे।