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देहात में देर रात तक सजने लगीं चौपालें

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धनौरी में चौपाल लगाते ग्रामीण । - फोटो : HARIDWAR
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चुनावी माहौल में ग्रामीण इलाकों की हुक्का चौपालों का जिक्र ना किया जाए तो चुनावी गतिविधियां मुकम्मल प्रतीत नहीं होती। देहात क्षेत्र में सजने वाली चौपाल अब देर रात तक सजने लगी हैं।
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अब तो चुनावी में शामिल होने वाले तमाम चेहरे भी सामने आ गए हैं, इसलिये चौपालों में मैदान में उतर चुके प्रत्याशियों की तुलनात्मक चर्चा जोरशोर से शुरू हो चुकी है। देहात की चौपाल हर चुनाव के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। ग्राम पंचायत चुनाव को यदि दरकिनार कर दिया जाए तो लोकसभा, विधानसभा, जिला पंचायत चुनाव में तो यह चौपालें रातभर में प्रत्याशियों का भाग्य का फैसला कर देती हैं।
चुनावी सरगर्मियों के साथ ही देहात क्षेत्र में ऐसी चौपालों का दौर शुरू हो गया है, दिन छिपते ही गांव के बुजुर्ग, नौजवान किसी बड़े घेर में बैठते हैं फिर शक्कर के दूध, चाय की चुस्की व हंसी के ठहाकों के बीच प्रत्याशियों के भाग्य की चर्चा शुरू हो जाती है। बदलते दौर में बुजुर्ग व नौजवान अलग-अलग चौपाले सजाने लगे हैं। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आती जाएगी। वैसे-वैसे चौपालों की अहमियत और बढ़ जाएगी। क्योंकि इन चौपालों में प्रत्याशियों का भाग्य तय होने लगता है। इसलिए कई बार तो प्रत्याशी भी अपने समर्थकों के जरिये चुनावी गणित का आंकलन करने के साथ ही कभी कभार दिन छिपते ही किसी चौपाल में शामिल होकर ग्रामीणों के रुझानों की टोह भी लेने की कोशिश करते हैं।
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पुराना इतिहास बताता है कि मतदान से पहली रात तक चलने वाली इन चौपालों में किसी एक प्रत्याशी के नाम पर सहमति बनती है और अगले दिन उसी का समर्थन लोटा नमक के रूप में किया जाता है। इसका असर मतदान स्थल पर भी दिखाई पड़ता है। इन दिनों भी6 घाड़ क्षेत्र में चौपालें सक्रियहोने लगी हैं। पिछले रिपोर्ट कार्ड की बात हो या समाज सेवा का जुनून प्रत्याशियों के प्रत्येक पक्ष का आंकलन खुले तौर पर शुरू हो जाएगा। संवाद
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