शहर में सर्दी के यात्रा सीजन के चलते पुलिस प्रशासन जीरो जोन की यातायात व्यवस्था सुधारने की कवायद में तो जुट गया है। बाकी शहर की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पूरे शहर में यातायात व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। हर रोज लोगों को जाम से जूझना पड़ रहा है। सड़कें ही पार्किंग बनी हैं। केवल जीरो जोन में सुधार होने से लोगों की मुश्किल कम होने वाली नहीं।
शुक्रवार को हरिद्वार कोतवाली में पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों की बैठक में जीरो जाने में आने वाले रिक् शा, ई-रिक्शा और ऑटो चालकों की मनमानी पर रोक लगाने, अतिक्रमण हटाने आदि पर जोर दिया गया था। बैठक में जीरो जोन से बाहर को लेकर कोई प्लान ही नहीं बनाया गया। जबकि शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार पर भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
शहर में इस समय मुख्य बाजार रानीपुर मोड़ से लेकर ज्वालापुर, कनखल और उत्तरी हरिद्वार में कोई भी ऐसी सड़क नहीं है, जहां जाम नहीं लगता हो। अतिक्रमण ने शहर की सूरत बिगाड़ दी है। कई स्थानों पर सड़कें खुदी हुई हैं। चंद्राचार्य चौक से सटे क्षेत्र का सबसे बुरा हाल है। किसी भी वक्त यहां से गुजरना मुसीबत से कम नहीं है। दूसरा यहां पार्किंग की जगह ही नहीं है। चौराहे के चारों तरफ सड़क पर वाहन पार्क किए जाते हैं और जाम की भी वजह बेतरतीब ढंग से पार्क होने वाले वाहन ही है। चंद्राचार्य चौक के अलावा पुराना रानीपुर मोड़, शंकर आश्रम, आर्यनगर, प्रेमनगर आश्रम चौक की स्थिति ज्यादा खराब है।
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रेहड़ी बाजार सबसे बड़ी बाधा
हरिद्वार (ब्यूरो)। शाम के समय सिटी अस्पताल के सामने का क्षेत्र चौपाटी बाजार में तब्दील हो जाता है। यहां रेहड़ी बाजार गुलजार होता है। जिस कारण देर रात तक मुख्य सड़क पर जाम लगा रहता है। इस तरफ से पुलिस विभाग और नगर निगम आंखें मूंदे बैठा है। पुलिस इसे नगर निगम के अधिकार क्षेत्र का बताकर पल्ला झाड़ लेती है। यही कारण है कि रेहड़ी बाजार से रोजाना कई हजार की अवैध उगाही होती है।
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ऑटो रिक्शा स्टैंड तो करो शिफ्ट
हरिद्वार (ब्यूरो)। जीरो जोन की बात करने से पहले हरिद्वार कोतवाली से सटे ऑटो रिक्शा स्टैंड को शिफ्ट करना होगा, लेकिन इस तरफ भी कोई ध्यान नहीं है। साइकिल रिक्शा का जमावड़ा पोस्ट ऑफिस तिराहे के पास लगा रहता है और रही सही कसर सड़क के दोनों तरफ हुए अतिक्रमण ने पूरी कर रखी है। ठीक ऐसे ही हालात रतन टाकीज के पास ऑटो स्टैंड, टैक्सी स्टैंड, भीमगोडा चेकपोस्ट के पास बने ऑटो विक्रम स्टैंड से पैदा हो रहे है। यह सड़क ही कभी ऋषिकेश-देहरादून हाईवे हुआ करता था। शहर में अनगिनत साइकिल रिक्शा, बैट्री रिक्शा, विक्रम एवं ऑटो रिक्शा है। न तो इनका कोई रूट तय है न ही ये पता है कि कितने अवैध रुप से दौड़ रहे हैं। इसलिए इनकी भीड़ भी यातायात व्यवस्था में सबसे बड़ी दिक्कत है।
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बोले अधिकारी
पूरे शहर की व्यवस्था सुधारने पर ही फोकस है। कही से तो शुरुआत करनी है। जीरो जोन के बाद पूरे शहर में सुधार करना है।
- मणिकांत मिश्रा, एसपी सिटी