यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो जिला जेल की पहचान भविष्य में बुनकर उद्योग के तौर पर भी होगी। देशभर में अपनी हस्तकला का लोहा मनवा चुके यूपी के भदोही के विशेषज्ञ बुनकर ही कारपेट बनाने में कैदियों को दक्ष करने में जुटे है।
जेल कैंपस में फिलहाल वीआईपी कंपनी की तीन यूनिट चल रही हैं। पावरलूम, हैंडलूम पहले से ही संचालित हो रहे हैं। अब बुनकर उद्योग में भी कुछ कर दिखाने की जेल के कैदियों ने ठानी है। खादी गांधी ग्रामोद्योग देहरादून से जुड़े भदोही के बुनकर शफीउल्ला, उनकी टीम के सदस्य आजकल हरिद्वार जेल के कैदियों को कारपेट बनाने की ट्रेनिंग दे रहे है। तरह तरह के डिजायन के कारपेट सैंपल के तौर पर जेल में लाए गए हैं, जिन्हें देखकर करीब 12 कैदी इस कला की बारीकियां सीखने समझने में जुटे हैं। जेल प्रशासन की सोच है कि कैदियों के इस कला में रच बस जाने के बाद जेल कैंपस में इस उद्योग का विस्तार करना है। जेल अधीक्षक एसके सुखीजा ने बताया कि ये अपने आप में एक अनोखा कार्य है। कारपेट की बाजार में जबरदस्त डिमांड में है। कैदियों के कारपेट बनाने में एक्सपर्ट होने पर जेल कैंपस से इस उद्योग को आगे बढ़ाया जाएगा। देश भर में लगने वाली प्रदर्शनियों में जेल का स्टॉल भी लगता है ऐसे में कारपेट वहां बेचे जाएंगे।