जनपद में सरकारी शिक्षकों के वेतन से हर महीने इनकम टैक्स तो कटता रहा पर आयकर विभाग में जमा नहीं हुआ। नतीजतन आयकर विभाग से शिक्षकों के मोबाइल पर लगातार मैसेज आ रहे हैं। शिक्षक इस लापरवाही के लिए शिक्षा विभाग और विभाग स्कूल- कालेजों को जिम्मेदार ठहरा रहा है। शिक्षकों का टैक्स जमा नहीं होने पर प्रभारी सीईओ ने बैठक बुलाई है।
शिक्षकों- कर्मचारियों के वेतन से हर महीने इनकम टैक्स कट जाता है। पिछले महीने तक यह सिलसिला जारी रहा। आयकर विभाग की चेतावनी से शिक्षकों के पेशानी में बल डाल दिए हैं। मैसेज के रूप में शिक्षकों को बताया गया है कि तिमाही के समापन के बाद उनका कोई टैक्स जमा नहीं हुआ है। जल्द टैक्स जमा करने की हिदायत दी गई है। हर महीने टैक्स कटने के बावजूद जमा नहीं होने पर शिक्षकों के मन में सवाल उठ रहे हैं। शिक्षक नेताओं तक भी यह समस्या पहुंच रही है।
शिक्षक इसके लिए विभाग को जिम्मेदार मान रहे हैं। जबकि शिक्षा विभाग का कहना है कि अधिकांश शिक्षकों का वेतन ट्रेजरी से निकलता है। वेतन बिल के साथ- साथ टैक्स काटने और जमा करने की जिम्मेदारी भी स्कूल- कालेजों की है।
...तो फार्म 24 भी नहीं भरे गए
पूरे मामले की पड़ताल में सामने आ रहा है कि इनकम टैक्स के आखिरी तिमाही के बाद फार्म 24 जमा नहीं किए गए। जानकारों के मुताबिक फार्म 24 में कर्मचारी आयकर विभाग को वित्तीय स्थिति का ब्यौरा देते हैं। शिक्षकों का कहना है कि फार्म 24 जमा न करने से यह समस्या आई है। शिक्षकों के मन में यह भय बना हुआ है कि दूसरों की करनी कहीं उन्हें न भुगतनी पड़ जाए।
वित्तीय मुद्दों पर होगी चर्चा
शिक्षकों की वित्तीय समस्याओं को लेकर प्रभारी सीईओ डा. पुष्पा रानी वर्मा ने नौ मार्च को रुड़की में बैठक बुलाई है। जिसमें वेतन, इनकम टैक्स, पेंशन और जीपीएफ के मसलों को सुलझाया जाएगा। शिक्षक संगठन लगातार इसकी मांग करते चले आ रहे हैं। प्रभारी सीईओ का कहना है कि माध्यमिक शिक्षकों की सेलरी ट्रेजरी से निकल रही है, टैक्स संबंधी जानकारी स्कूल खुद जमा करते हैं। किसी तकनीकी खामी से शायद टैक्स जमा नहीं हो पाया होगा। टैक्स सहित शिक्षकों की सभी वित्तीय समस्याओं को लेकर नौ मार्च को बैठक बुलाई गई है।