हरिद्वार में तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में केआरएल कंपनी के मजदूर हड़ताल पर चले गए हैं। बृहस्पतिवार को मजदूरों के हड़ताल पर जाने के कारण नगर निगम के कई इलाकों से कूड़ा नहीं उठा। जगह-जगह गंदगी के ढेर लग गए हैं। जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों भगत सिंह चौक के पास टिबड़ी स्थिति केआरएल के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। मजदूरों ने भुगतान होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया।
कूड़ा उठाने के बकाया शुल्क को लेकर कंपनी और नगर निगम मेें एक बार फिर से ठन गई है। केआरएल कंपनी का आरोप है कि बोर्ड के प्रस्ताव के बावजूद मुख्य नगर अधिकारी ने टिपिंग फीस का भुगतान नहीं किया है। मेयर ने भुगतान के लिए एमएनए को पत्र भी लिखा था। नगर निगम से भुुगतान नहीं मिलने के कारण कंपनी अपने लगभग 100 कर्मचारियों को तीन से पांच महीने का भुगतान नहीं दे पाई है। वेतन नहीं मिलने से सफाई मजदूर हड़ताल पर चले गए। बृहस्पतिवार को 13 वार्डों में घर-घर से कूड़ा एकत्र करने और उठाने का काम ठप रहा। कृष्णानगर, नया हरिद्वार, गोविंदपुरी, ऋषिकुल आदि क्षेत्रों में एक दिन की हड़ताल से ही कूड़े के ढेर लग गए हैं। जिससे लोगों को परेशानी का सामान करना पड़ा। हड़ताली कर्मचारी दिन भर धरने पर बैठे रहे। धरने का नेतृत्व करने वालों में अमित कुमार, मुकेश कुमार, विशेष कुमार, दीपक कुमार, मनोज कुमार, रंजीत कुमार, सुरेश कुमार आदि शामिल थे। सफाई मजदूर कांग्रेस के अध्यक्ष सुरेंद्र तेश्वर व रमेश चंद्र छाछर ने उनकी हड़ताल का समर्थन किया है।
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हड़ताल से हमारा लेना देना नहीं
मुख्य नगर अधिकारी विप्रा त्रिवेदी का कहना है कि केआरएल के मजदूरों की हड़ताल से नगर निगम का कोई लेना देना है। टिपिंग फीस का बकाया नहीं देने के कंपनी अधिकारियों के आरोप को झूठा है। नगर निगम के लगभग 46 लाख रुपये केआरएल के पास हैं। जिससे वे अपने कर्मचारियों को वेतन दे सकते हैं। केआरएल लगातार अनुबंध का उल्लंघन कर रहा है। उसने अभी तक केवल सात वाहनों की ही रजिस्ट्रेशन जमा कराया है और वह कंपोस्ट प्लांट लगाने के लिए अभी एनओसी भी नहीं लाया है। केआरएल के विरूद्घ नियमानुसार कार्रवाई करने के संबंध में नोटिस भेजा जा रहा है और सफाई निरीक्षकों को केआरएल वाले वार्डों में सफाई की वैकल्पिक व्यवस्था कराने के लिए कहा गया है।
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एफआइआर दर्ज कराने का निर्देश
मेयर मनोज गर्ग का कहना है कि केआरएल के विरुद्घ एफआइआर दर्ज कराने को एमएनए को कहा गया है। नगर निगम ने बोर्ड की बैठक के बाद 30 लाख रुपये का भुगतान किया था। केआरएल ने इसके बाद भी कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया और अधिकारी पैसा लेकर कोलकाता चला गया। केआरएल को 5-5 वार्ड कर सभी वार्डों में घर-घर कूड़ा लेने का काम करना था। इसके बाद ही उसे पैसा दिया गया, लेकिन वह 13 वार्डों से आगे नहीं बढ़ा है। कर्मचारियों को वेतन आदि की व्यवस्था करना केआरएल का काम है। हड़ताल भी केआरएल के अधिकारियों की साजिश का नतीजा है।
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नगर निगम ने देने हैं 70 लाख
केआरएल कंपनी के सुपरवाइजर प्रमोद कुमार शर्मा का कहना है नगर निगम ने टिपिंग शुल्क के 70 लाख रुपये देने हैं। बोर्ड ने 55 लाख रुपये के भुगतान का प्रस्ताव भी पास कर दिया था। इसके बावजूद एमएनए ने बकाया भुगतान नहीं किया है। सफाई कर्मियों का 3 महीने और अन्य स्टाफ का 5 महीने का भुगतान नहीं हुुआ है। चार दिन पूर्व मेयर ने भुगतान के लिए भी पत्र लिखा इसके बाद भी एमएनए ने भुगतान नहीं किया।