ज्वालापुर के पुल जटवाडा से सटे घाट पर महर्षि वाल्मीकि घाट के बोर्ड को रंग मिटोने पर वाल्मीकि समाज भड़क उठा। वाल्मीकि समाज ने ज्वालापुर कोतवाली का घेराव किया और शरारती तत्वों को गिरफ्तार करने की मांग की।
पिछले माह मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुल जटवाडा से सटे गंगा घाट का नाम महर्षि वाल्मीकि घाट करने की घोषणा की थी। बाकायदा गंगा घाट पर महर्षि वाल्मीकि घाट का बोर्ड भी लगा दिया गया था। सोमवार दोपहर को वाल्मीकि समाज को पता चला कि बोर्ड पर रंग कर महर्षि वाल्मीकि घाट नाम मिटा दिया गया। यह बात आग की तरह फैल गई। वाल्मीकि समाज के लोग भारी संख्या में एकत्र होकर कोतवाली ज्वालापुर पहुंचे। कोतवाली प्रभारी नवीन चंद्र सेमवाल के न मिलने पर आक्रोशित वाल्मीकि समाज के लोगों ने तहरीर देकर शरारती तत्वों की गिरफ्तारी की मांग उठाई। आरोप लगाया कि माहौल खराब करने के मकसद से इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया है।
एसएसआई जगमोहन रमोला ने कोतवाली प्रभारी नवीन चंद्र सेमवाल से वाल्मीकि समाज के लोगों की बात कराई। कोतवाली प्रभारी ने आश्वस्त किया कि आरोपियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। आश्वासन मिलने पर वाल्मीकि समाज के लोग वापस लौट गए। कोतवाली का घेराव करने वालों में प्रिंस लौहट, सुरेश चौधरी, सुनील चौधरी, हंसराज कटारिया, प्रेम चंचल, एसपी सिंह, निर्देश, लक्ष्मी चंद, देवी प्रसाद, राजेश छाछर, बंटी, प्रमोद, राजकुमार, सतपाल, राजकुमार, रणवीर समेत अनेक लोग शामिल रहे।