यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अखाड़ा परिषद को देश के चार कुंभ नगरों में संतों को भूसमाधि देने के लिए भूमि देने की स्वीकृति दे दी है। अखाड़ा परिषद लंबे समय से यह मांग कर रही थी। अखाड़ा परिषद अब देहरादून, मुंबई तथा भोपाल जाकर वहां की सरकारों से भी इस संबंध में वार्ता करेेगी।
लखनऊ और इलाहाबाद से लौटकर अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने बुधवार को यह जानकारी पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चार घंटों तक संतों की समस्याओं को हल करने के लिए विभिन्न विभागों को त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए। प्रयाग में आगामी अर्द्धकुंभ के लिए नववर्ष से काम शुरू हो जाएगा। अखाड़ा परिषद की ओर से विभिन्न अखाड़ों की सहमति से दिए गए प्रस्तावों पर अखिलेश से सहमति जताई है। हरि गिरि ने बताया कि देश की विभिन्न नदियां प्रदूषण का शिकार हैं। इलाहाबाद का संगम तट और हरिद्वार का गंगातट काफी गंदा हो चुका है। संन्यासियों में परंपरा है कि मृत संतों को जल समाधि दी जाती है।
यद्यपि कुछ अखाड़े अपने संतों के शवों को जलाते हैं। इसके विपरीत संन्यासियों में दाह संस्कार वर्जित बताया गया है। पहली बार वर्ष 2010 के हरिद्वार कुंभ में अखाड़ा परिषद ने भूसमाधि का प्रस्ताव पारित किया था। समस्या स्थान को लेकर थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने विधिवत रूपरेखा तैयार कर हरिद्वार में भूसमाधि के लिए भूमि देने का आदेश जारी कर दिया था। इसके लिए तत्कालीन जिलाधिकारी और मेलाधिकारियों ने कई भूखंडों का अवलोकन संतों को कराया। संतों ने एक भूमि पर सहमति जताई थी। हालांकि अब तक भूमि आवंटित नहीं हुई। ऐसे ही प्रस्ताव प्रयाग, नासिक और उज्जैन कुंभ मेलों के दौरान तत्कालीन सरकारों को भी दिए गए। अब उत्तर प्रदेश में भूमि देने पर सहमति दे दी है।
श्री महंत हरि गिरि ने बताया कि भूमि की मांग काशी जैसे उन अन्य तीर्थों पर की गई है, जहां संतों के आश्रम और अखाड़े स्थित है। मथुरा, वृंदावन तथा अयोध्या तीर्थों पर बैरागियों के डेरे अधिक हैं। इन तीर्थोँ पर शवों का दाह संस्कार किया जाता है। जहां-जहां दाह संस्कार होते रहते हैं वहां भूमि की मांग नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में अखाड़ा परिषद कई राज्यों की राजधानियों का दौरा कर भूमि की मांग करेंगी। दक्षिण भारत में शैव संप्रदाय से जुड़े अनेक तीर्थ है, उन सभी पर भूमि मांगी जाएगी। मुख्यमंत्री से मिले प्रतिनिधि मंडल में परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि सहित परिषद के तमाम पदाधिकारियों ने भाग लिया। इसके बाद प्रयाग लौटकर अर्द्धकुंभ मेले का संगम पूजन सहर्ष कर दिया गया।