बैसाखी पर्व पर देश के विभिन्न भागों से आए करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाई। स्नानोपरांत श्रद्धालुओं ने नियत घाटों पर जाकर तर्पण और अनेक प्रकार के कर्मकांड भी संपन्न कराए। संक्रांति का स्नान आज भी होगा। जबकि पुण्यकाल का स्नान सवेरे भी होगा।
बैशाख कृष्ण तृतीया के दिन पड़ी बैसाखी अरसे बाद बैशाख में आई है। स्नानार्थियों ने सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया और गंगा घाटों पर बैठकर वैशाख महात्म्य की कथा सुनी। वैशाख के पवित्र मास में पड़ने वाले विभिन्न पर्वों का वर्णन कथा में किया गया और इससे मिलने वाले पुण्य का लाभ भी श्रद्धालुओं को बताया गया। हरकी पैड़ी पर प्रात:कालीन आरती के बाद स्नानार्थियों का आगमन प्रारंभ हुआ और शाम तक चलता रहा। अनुमान के विपरीत भीड़ कम आई। अलबत्ता कल शाम तक उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और जम्मू कश्मीर के श्रद्धालु गंगा नहाने के लिए पहुंच गए थे। श्रद्धालुओं ने कुशावर्त घाट जाकर कर्ण छेदन, मुंडन, यज्ञोपवीत, तर्पण आदि संपन्न कराए। कुछ श्रद्धालुओं ने पितरों के निमित्त भी कुशावर्त और नारायणी शिला पर पितृ श्राद्ध कराए। वैशाख के पर्व पर नई फसल का दान पुरोहितों को दिया गया। महिलाओं ने नए संवत और बैसाखी पर्व का महत्व सुना।
बैसाखी के अवसर पर हरिद्वार के धार्मिक क्षेत्र में अनेक प्रकार की कथाओं का आयोजन हुआ। उत्तरी हरिद्वार के आश्रमों में कहीं रामकथा तो कहीं वैशाख महात्म्य कथा प्रारंभ हुई। ये कथाएं एक सप्ताह तक चलेंगी। शुक्ल पक्ष में एक बार फिर से कथाओं का शुभारंभ होगा। साथ ही विभिन्न धार्मिक विषयों पर चिंतन और मंथन करते हुए प्रश्न मालाओं का आयोजन भी विभिन्न धर्म स्थलों पर किया जाएगा। श्रद्धालुओं ने निकटवर्ती मंशा देवी और चंडी देवी के मंदिरों में जाकर भी दर्शन किए।