सुदर्शन आश्रम में घुसे अधेड़ को चोर समझकर पीट-पीट कर मार देने के आरोप में रविवार को पुलिस ने आश्रम प्रमुख रघुवीर दास और संस्कृत छात्र सुमित बडोनी को गिरफ्तार कर लिया। शनिवार दिनभर से लेकर रविवार को हरिद्वार कोतवाली में गहमागहमी का माहौल बना रहा। जब तक पुलिस बाबा को कोर्ट में पेश करने नहीं ले गई तब तक उनके समर्थन में संत, भाजपा और कांग्रेस के नेताओं का जमावड़ा लगा रहा।
शुक्रवार देर रात आश्रम में घुस आए पेशे से चालक लखपत सिंह नेगी (52 वर्ष) पुत्र देवसिंह निवासी गांव चरी तहसील जिला चमोली की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। संत की सूचना पर जब स्थानीय पुलिस आश्रम पहुंची तब अधेड़ को जिला अस्पताल ले जाया गया था जहां उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। लखपत पेशे से चालक था और जीएमओयू बस स्टैंड से बस चलाता था। पुलिस की पड़ताल में सामने आया था कि लखपत आश्रम से सटे होटल की छत से होते हुए आश्रम की छत पर पहुंचा था। उसके भतीजे अनिल नेगी ने संत रघुवीर दास, संस्कृत छात्र सुमित बडोनी निवासी गांव भटवाडा, पट्टी नेलचामी, जिला टिहरी गढ़वाल हाल निवासी सुदर्शन आश्रम के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।
विवेचक एसएसआई गिरिश चंद्र शर्मा ने बताया कि गैर इरादतन हत्या के आरोप में संत एवं संस्कृत छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया है। इधर, संत के समर्थन में सुबह से ही संत समाज, राजनीतिक दलों से जुड़े लोग कोतवाली में डेरा डाले रहे।
क्या ऐसे होते हैं संत
हरिद्वार (ब्यूरो)। क्या एक संत में इतना गुस्सा होता है। वह किसी को जानवर की तरह पीट-पीट कर उसकी जान ले ले। ये बात लखपत के परिजन बार-बार बोलते रहे। भले ही लखपत सिंह आश्रम में घुस गया था। उसे पुलिस को सौंप देते। भला मारने की क्या आवश्यकता था। यदि मारा भी तो, कोई ऐसे बेरहमी से मारता है।