दिव्य प्रेम सेवा मिशन के रजत जयंती समारोह में पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि कुष्ठ रोगियों की सेवा स्वामी विवेकानंद और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी की थी। गांधीजी का मानना था कि कुष्ठ रोग भी हैजा और प्लेग जैसी ही बीमारी है। इसका इलाज हो सकता है। इसके रोगियों को हीन समझने वाले ही असली रोगी हैं। उनका यह संदेश आज भी प्रासंगिक है। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि को देश में राष्ट्रीय कुष्ठ दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मानवता की सेवा में समर्पित अपने जीवन-काल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कुष्ठ रोगियों का भी उपचार और देखभाल करते थे। वर्ष 1932 में यरवदा जेल में कारावास के दौरान उन्होंने कुष्ठ रोग से ग्रसित अपने मित्र परचुरे शास्त्री के लिए एक संदेश भेजा था। इसमें लिखा गया था कि हमारे शरीर बीमार पड़ते हैं लेकिन आप शरीर नहीं बल्कि एक आत्मा, एक चेतना हैं। अपनी चेतना को जागृत करें। जेल से रिहा होने के बाद परचुरे शास्त्री की सेवा और उपचार स्वयं गांधी ने किया था। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि जीव सेवा से बढ़कर और कोई दूसरा धर्म नहीं है। सेवा धर्म का यथार्थ अनुष्ठान करने से संसार का बंधन सुगमता से छिन्न हो जाता है। स्वामी विवेकानंद कुष्ठ रोग की औषधि और कुष्ठ रोगियों की सेवा के विषय में भी सचेत थे।
‘उत्तराखंड की धरती की महिमा अनन्य’
राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि उत्तराखंड की इस पावन धरती की महिमा अनन्य है। प्राचीन काल से ही लोग इस पवित्र भूमि पर पहुंचकर शांति व ज्ञान प्राप्त करते रहे हैं। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे धाम इस भूखंड पर ही स्थित हैं। हरि द्वार और हर द्वार इन दोनों नामों से प्रसिद्ध यह नगर भगवान विष्णु व महादेव शंकर दोनों की ही प्राप्ति का द्वार माना जाता है। पतित पावनी गंगा इस लीला की साक्षी भी हैं और जीवनदायिनी भी।
सुरक्षा के इंतजाम रहे फुल प्रूफ
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम पूरी तरह से पुख्ता रहे। फ्लीट मार्ग से लेकर कार्यक्रम स्थल पर लगातार चेकिंग चलती रही। इसके साथ ही फ्लीट मार्ग व कार्यक्रम स्थलों पर स्नाइपर की तैनाती भी की गई थी। बीएचईएल में बने हेलीपैड पर सिविल पुलिस के साथ ही पीएसी के जवानों को तैनात किया गया था। फ्लीट मार्ग पर सीपीयू, सिविल पुलिस व यातायात पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। कार्यक्रम स्थल पर डॉग स्क्वॉड लगातार चेकिंग करता रहा। एलआईयू के साथ ही आईबी के जवान भी तैनात रहे।
स्वर्णिम उपलब्धियाें में छिपी है तपस्या, सेवा और निष्ठा : राज्यपाल
समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम ‘सेवा की साधना’ को समर्पित है। सेवा की साधना की प्रेरणा हमारे ऋषि-मुनियों की देन है। भारतीय शास्त्रों की देन है। पवित्र गुरुवाणी और सिख जीवन दर्शन में सेवा व परिश्रम को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। संस्था की इन स्वर्णिम उपलब्धियों की पृष्ठभूमि में पिछले 25 वर्षों की तपस्या, सेवा और निष्ठा छिपी हुई है। उन्होंने कहा कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन ने ‘नर सेवा, नारायण सेवा’ के मंत्र को समझा और एक कठिन कार्य को अपने हाथों में लिया है। कुष्ठ रोगियों के बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाना असंभव को संभव बनाने जैसा है। ये कार्य एक सच्चा देशभक्त, राष्ट्रभक्त ही कर सकता है।
मिशन के संकल्प में कोई विकल्प नहीं : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन से जुड़े लोगों ने वर्ष 1997 से आजतक तिल-तिल जलाकर इस मिशन को आगे बढ़ाया है। जिसके प्रेम में दिव्यता होती है उनके लिए दूसरों की सेवा करना ही धर्म बन जाता है। कुष्ठ रोगियों के हित के लिए यह संस्था निरंतर कार्य कर रही है। वे सैनिक के पुत्र हैं और सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता है। इस विकल्प रहित संकल्प के सेवा के मिशन को पूर्ण करने में उनका सहयोग रहेगा।