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मोबाइल से खुलेगा हत्याकांड का राज

Fri, 09 Dec 2016 10:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
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लेबर कांट्रेक्टर निपेंद्र हत्याकांड का राज मोबाइल फोन से खुल सकता है। घटनास्थल से मोबाइल गायब होने पर पुलिस की निगाह गढ़ी है। एसओजी की मदद से मोबाइल की कॉल डिटेल और आखिरी लोकेशन की जानकारी ली जा रही है। इधर, नामजद युवकों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

मूल रूप से बिजनौर के गांव खैरपुर थाना चांदपुर निवासी निपेंद्र का शव पुल जटवाडा से आगे गंगनहर पटरी पर बरामद हुआ था। सिडकुल में लेबर कांट्रेक्टर रहे निपेंद्र की छाती पर गोली मारी गई थी। ज्वालापुर क्षेत्र के ही गांव सीतापुर में परिवार समेत किराये पर रह रहे कांट्रेक्टर की हत्या के कारण तलाशने में ज्वालापुर पुलिस जुटी है। देर रात ही मृतक की पत्नी आरती ने मनीष एवं कपिल नाम के दो युवकों पर हत्याकांड को अंजाम देने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
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घटनास्थल से पुलिस को मोबाइल भी नहीं मिला था जबकि जेब से साढ़े चार हजार की नगदी एवं दस्तावेज बरामद हो गए थे। पुलिस का फोकस मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकालना है और आखिरी लोकेशन ली जा रही है। ताकि हत्याकांड की गुत्थी को सुलझाया जा सकें। इधर, पुलिस ने हत्याकांड में नामजद मनीष एवं कपिल को हिरासत में लेकर भी पूछताछ शुरु कर दी है।

मनीष की सिडकुल से सटे आदर्श नगर रामधाम कालोनी में मोबाइल फोन की दुकान है। उसका कहना है कि तीस तारीख के बाद वह निपेंद्र से मिला ही नहीं है। वहीं, रिश्ते में भतीजे लगने वाले कपिल ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह उसके कमरे पर निपेंद्र आया था। चाय पी थी और चला गया था। कोतवाली प्रभारी नवीन सेमवाल ने बताया कि हत्याकांड की हर पहलू पर जांच कर रहे है।

आखिरी बात पत्नी से हुई थी
मृतक निपेंद्र की पत्नी आरती से आखिरी बार बातचीत बृहस्पतिवार शाम करीब सवा सात बजे हुई थी। उसके पत्नी को बोला था कि वह जल्द घर आ रहा है। फिर उससे बातचीत नहीं हुई।

...तो लाकर फेंका गया शव
गंगनहर पटरी पर आवाजाही देर रात तक रहती है। इसलिए, यह बात बलवती हो रही है कि उसकी हत्या किसी दूसरे स्थान पर की गई होगी। फिर शव को लाकर यहां फेंका गया है। ये बात दबी जुबां में पुलिस भी स्वीकार रही है। पर, हत्याकांड के खुलासे तक कोई सीधे सीधे बोलने को तैयार नहीं है।

कोई खास काम नहीं था
लेबर कांट्रेक्टर निपेंद्र चौधरी दस-बारह साल से हरिद्वार में रह रहा था। पर, उसका काम कोई खास नहीं था। उसके पास एक ही फैक्ट्री थी, जहां उसकी लेबर कार्यरत है। लिहाजा आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं थी। इसलिए, लेन देन की बात को भी पुलिस साइड में रखकर जांच कर रही है।
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पटरी पर ही मारी गई गोली
घटनास्थल से मिले 315 बोर के कारतूस से साफ है कि हत्याकांड को गंगनहर पटरी पर ही अंजाम दिया गया। ये  कोतवाली प्रभारी नवीन सेमवाल ने प बताया कि इस बोर का इस्तेमाल अमूमन देसी तमंचे में ही किया जाता है। एसओजी ने जब निपेंद्र चौधरी का मोबाइल फोन खंगाला तब उसकी आखिरी लोकेशन रानीपुर झाल पर ही थी। शाम करीब आठ बजे के बाद उसका मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया था। अब कॉल डिटेल खंगाल रहे हैं।
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