बैंकों व एटीएम पर आम जरूरतमंदों की कतारें टूटने का नाम नहीं ले रही हैं। दैनिक जरूरत के हिसाब से बैंकों में कैश की कमी तो है, परंतु इतनी भी नहीं है जितनी लंबी लाइनें लगवाई जा रही हैं। विभिन्न बैंकों के अंदर नजारा कुछ और ही देखा जा रहा है। रसूखदार बैंक अधिकारियों के पास बैठकर कैश पर हाथ मार रहे हैं। उनके लिए हर समय बैंकों के द्वार और तिजोरी खुली हुई है।
रसूखदार बैंक में प्रतिदिन आने वाले कैश पर एकाधिकार समझकर झपट रहे हैं। कर्मचारियों को पूरा वेतन और मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पा रही है। लाइन में लगे थोड़े से लोगों को 2000-4000 रूपये देकर कैश नहीं है कि तख्ती लटका कर बैरंग लौटाया जा रहा है। पूर्व बैंक प्रबंधक सुभाष घई ने कहना है कि नोटबंदी से मोदी सरकार ने जो आर्थिक संकट खड़ा किया है वह जल्दी से दूर होने वाला नहीं है। इसलिए बैंक में कैश पहुंचते ही पहुंच वाले लोग ज्यादा से ज्यादा कैश लेने की होड़ लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि कैश का संकट इसलिए अधिक हो रहा है कि जिन बड़े लोगों ने पुराने नोट जमा कराए थे उनके बदले नए नोट ले गए थे, उन्हें सर्कुलेशन में नहीं लाया जा रहा है। बैंक से पैसा निकालकर लोग घर में जमा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बैंक अधिकारियों को कुछ लोगों के हित में कैश का कृत्रिम अभाव पैदा कर आम जनता को परेशान नहीं करना चाहिए। सुभाष घई ने कहा कि प्राइवेट बैंक के अधिकारियों द्वारा करोड़ों के नए करेंसी नोट की जालसाजी में पकड़े जाने से बैंकिंग सिस्टम को धक्का लगा है। ऐसे में राष्ट्रीयकृत बैंक कर्मियों को हमेशा की तरह संकट में लोगों को विश्वास बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए।
नोटबंदी का दिख रहा पेट्रोल पंपो ंपर असर
पथरी (ब्यूरो)। क्षेत्र में नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर पेट्रोल पंपों पर पड़ा है। एकड़, ऐथल, बादशाहपुर, शाहपुर, भोगपुर, मुस्तफाबाद (पदार्था), फेरूपुर आदि स्थानों पर पेट्रोल पंप हैं। एक पेट्रोल पंप के संचालक योगी मदान का कहना है कि जब से डीजल व पेट्रोल की खरीद में पुराने नोट लेने बंद हुए है। तब से घटकर बिक्री एक चौथाई हो गई है।