यात्रा सीजन में प्रति सप्ताह औसतन 4 से 5 लाख तीर्थयात्री एवं पर्यटक हरिद्वार आते-जाते हैं। इस पांच फ्लोटिंग पॉपुलेशन (प्रवाही जनसंख्या ) का दबाव शहर पर पड़ता है। इस अतिरिक्त बोझ को उठाने के लिए कभी कोई तैयारी व योजना नहीं बनाई गई है।
शहर में तीर्थयात्रियों के लिए पर्याप्त सस्ते आवास की व्यवस्था नहीं है। धर्मशालाएं अब नाम की ही रह गई हैं। कुछ धर्मशालाएं तो होटलों से भी महंगी हो गई हैं। टैक्स चोरी के लिए ही धर्मशाला का बोर्ड टांग रखा है। अनेक धर्मशालाएं होटल में भी परिवर्तित हो चुकी हैं। शहर में तथा गंगाघाटों मेला क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालयों तथा वाहन पार्किंग आदि मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव हैं। यात्रियों को न चाहते हुए भी खुले में गंगा किनारे मलमूत्र त्यागने को मजबूर होना पड़ता है। सड़कों के किनारे, लोगों की दुकानों व गलियों के अंदर अपने वाहन पार्क करने को मजबूर होना पड़ता है। पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से सप्ताह में तीन दिन शुक्रवार की शाम से रविवार की रात तक यात्रियों को भी और स्थानीय लोगों को भी जाम की समस्या से जूझना पड़ता है।
चार वाहन पार्किंग बनाने का है प्रस्ताव
शहरवासियों के साथ ही तीर्थयात्रियों की वाहन पार्किंग की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर ही नगर निगम ने यात्री बाहुल्य क्षेत्र के चार स्थानों पर वाहन पार्किंग बनाने का प्रस्ताव 19 अप्रैल को संपन्न बोर्ड बैठक में पारित किया है। हरकी पैड़ी के सामने वीआईपी घाट के सामने लालजीवाला में नगर निगम की भूमि पर, ग्रीन विस्टा बेलवाला, सूखी नदी खड़खड़ी तथा ललतारौ के निकट वाहन पार्किंग की जानी है। पार्किंग का ठेका शीघ्र देने के लिए नगर आयुक्त को निर्देशित कर दिया गया है। पार्किंग स्थलों पर शौचालयों की व्यवस्था भी कराई जाएगी, ताकि यात्री गंगा किनारे व खुले में मलमूत्र त्यागने को मजबूर न हों।
मनोज गर्ग, मेयर, नगर निगम हरिद्वार।
शौचालयों से नहीं हटाए गए कब्जे
यात्रियों की सुविधा तथा गंगा को प्रदूषित होने से बचाने के उद्देश्य से तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सार्वजनिक शौचालयों को कब्जों से मुक्त कराकर जन उपयोगी बनाने के लिए निर्देश दिए थे। उन्होंने सीडीओ, नगर आयुक्त व शहर कोतवाली इंस्पेक्टर की कमेटी भी बनाई थी, जिसको शौचालयों की जांच करने तथा उन्हें कब्जा मुक्त करने की कार्रवाई करनी थी। इस कमेटी ने कब्जों की जांच तो कि परंतु राजनीति दबाव में शौचालयों को कब्जा मुक्त नहीं कराया। यह भी आरोप है कि अधिकारियों ने सुलभ इंटरनेशनल से मिलीभगत कर उसके शौचालय चलवाने के लिए अपने शौचालयों की अनदेखी की है।
सीवरेज सिस्टम भी हो जाता है फेल
हर सप्ताह लाखों तीर्थयात्रियों व पर्यटकों के पहुंचने से शहर का सीवरेज सिस्टम भी जवाब दे जाता है। अनुरक्षण शाखा (गंगा) के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता कम और सीवर का उत्सर्जन अधिक होने से सिस्टम गड़बड़ा जाता है। मजबूरी में सीवर को बाईपास कर निकाल दिया जाता है, जिससे गंगा प्रदूषित होतीं हैं। इसके लिए प्रत्येक सीवरेज पंपिंग स्टेशन से एक बाईपास पाइप निकाला हुआ है। अनुरक्षण इकाई के अधिशासी अभियंता अजय कुमार का कहना है कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता वृद्धि का काम होना स्वीकृत है। जल्दी काम होने की उम्मीद है।
बिजली की आंख मिचौली
फ्लोटिंग पॉपुलेशन की जरूरत के हिसाब से किसी भी सरकारी विभाग ने अपना सिस्टम नहीं बनाया है। लाखों यात्रियों के एक साथ शहर में आने पर आश्रम, धर्मशाला, होटल, लॉजिंग हाउस फूल हो जाते हैं। जिससे बिजली की खपत भी बढ़ जाती है। एक साथ लाखों एसी व कूलर आदि विद्युत चालित उपकरणों के चलने से लोड़ बढ़ जाता है और फिर लोगों को बिजली की आंख मिचौली का सामना करना पड़ता है। लोड बढ़ने से बिजली की तारों व जोड़ों में स्पार्किंग होने लगती है, तारों को जलने बचाने के लिए बिजली बंद भी करनी पड़ती है।