हरिद्वार। धर्मनगरी में इन दिनों अर्द्धकुंभ मेला चल रहा है। दो दिन बाद सोमवती अमावस्या का स्नान हो रहा है। लेकिन उत्तरी हरिद्वार के संत बाहुल्य सप्तसरोवर क्षेत्र में गंगा पर बने घाटों पर गंगा जल ही नहीं है। इससे आहत संत शनिवार को सड़कों पर उतर आए। प्रशासन से घाटों पर गंगाजल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भूमाघाट पर प्रदर्शन किया। साथ ही हाथों में गंगाजल लेकर सूखे घाटों पर गंगा लाने के लिए संघर्ष करने की शपथ ली।
पिछले कुछ वर्षों से गंगा के उत्तरी हरिद्वार के घाटों पर गंगाजल उपलब्ध नहीं है। जिसके कारण इन घाटों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को स्नान आदि के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संत समाज लंबे समय से इन घाटों पर गंगाजल उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से नाराज संतों ने शनिवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान अखिल भारतीय सनातन संत समाज समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत विनोद गिरि ने कहा कि भूमाघाट सहित सप्तरोवर के सभी घाटों पर गंगा की धारा लाने के लिए अब जो भी करना पड़ेगा संत समाज करेगा। कुंभ में भी यदि घाटों पर प्रशासन गंगा नहीं ला सकता तो फिर कब लाएगा। घाटों पर रेत-बजरी और पत्थरों के टीले तक प्रशासन ने अर्द्धकुंभ मेले के लिए साफ नहीं करवाए। केवल जेसीबी से एक नाला बना कर अपने काम की इतिश्री कर दी। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। गंगा किनारे मलमूत्र त्याग कर गंगा को प्रदूषित किया जा रहा है। इस ओर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। करोड़ों रुपये अर्द्धकुंभ मेले पर खर्च किए जा रहे हैं लेकिन घाटों पर जल तक नहीं है। उन्होंने कहा कि संत समाज जनजागरण कर राज्य व केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे। उसके बाद भी ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन किया जाएगा।
महामंडलेश्वर ईश्वर दास ने कहा कि गंगा की अविरल धारा में किसी भी प्रकार की बाधाएं न डाली जाए। भूमाघाट सहित सभी घाटों पर गंगाजल लाया जाए। समिति के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद महाराज ने घाटों की जल्द सफाई कर गंगा की धारा प्रवाह के रूप में छोड़ने की मांग प्रशासन से की। काली मंदिर डासना के यति बाबा नृसिंहानंद सरस्वती ने घाटों का सुंदरीकरण कराने की आवाज उठाई। सनातन हिंदू वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष अमित वालिया, महंत विनय सारस्वत, महंत साधनानंद, महामंडलेश्वर स्वामी सह जयप्रकाश सरस्वती, महंत रामगिरि, स्वामी माधवानंद, स्वामी पूर्णानंद गिरि, स्वामी हरिराम गिरि, श्रीमहंत अनुराधा गिरि, स्वामी भैरव गिरि, स्वामी आत्मानंद पुरी, पहलवान बाबा, स्वामी रविंद्रानंद, स्वामी गणेशदास, साध्वी रंजना माता, मिथलेश दास एवं समाज सेवी सत्यप्रकाश जखमोला आदि ने घाटों पर गंगा की जलधारा लाने के लिए हाथ में गंगाजल लेकर शपथ ली।
जून 2013 से सूखे हैं घाट
हरिद्वार। संत बाहुल्य क्षेत्र के गंगा पर बने घाटों पर 16 और 17 जून 2013 को गंगा में आई बाढ़ के बाद से गंगाजल नहीं है। केदारघाटी की जलप्रलय के निशान अभी तक धर्मनगरी में मौजूद हैं। श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए आश्रमधारी संतों द्वारा गंगा पर बनाए घाटों पर सिल्ट जमा है। इन घाटों पर गंगाजल लाने की मांग तभी से संत समाज एवं नागरिक कर रहे हैं। लेकिन गंगा में खनन कार्य पर प्रतिबंध के चलते घाटों से सिल्ट नहीं उठाया जा रहा है।