हरिद्वार। यूपी सिंचाई विभाग ने गंगनहर पर बने दस पुलों को भारी वाहनों के आवागमन के लिए निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया है। विभाग ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इन पुलों पर यातायात बंद कराने की संस्तुति की है।
पिछले महीने महाराष्ट्र में एक पुल गिरने से कई लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद से देशभर में जर्जर हो चुके पुलों को चिह्नित किया जा रहा है। हरिद्वार जिले में भी ऐसे पुलों को चिह्नित किया गया। उत्तरी खंड गंगनहर रुड़की के अधिशासी अभियंता सीबी यादव ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बताया कि अंग्रेजों के समय में बनाए गए जिले के दस पुल अपनी समय सीमा पूरी कर चुके हैं। ये पुल अब भारी यातायात को सहने लायक नहीं हैं। उन्होंने इन पुलों पर भारी वाहनों का आवागमन बंद कराने की संस्तुति की है। जिलाधिकारी ने इस संस्तुति को देखते हुए विभागीय अधिकारियों को पहले अपनेे विभागीय स्तर पर तकनीकी रूप से इन सभी पुलों का परीक्षण कराने और भारी और मजबूत एंगल लगाकर भरी वाहनों का प्रवेश रोकने के आदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिए हैं।
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जिम्मेदारी से नहीं बच सकते
जिलाधिकारी ने उत्तरी खंड गंगनहर के अधिशासी अभियंता के पत्र में जवाब में लिखा है कि इन पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही बंद कराने से पहले उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ भी समन्वय बनाना चाहिए। केवल एक पत्र लिख देने से वे कोई दुर्घटना होने पर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
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ये पुल है शामिल
हरिद्वार में मायापुर पुल, कनखल में सिंहद्वार पुल, ज्वालापुर में जटवाड़ा पुल, धनौरी में दो पुल, कलियर के पास वाला पुल, मेहवड़ कला में बाजूहेडी को जोड़ने वाला पुल। सोलानी नदी पर मेहवड़ और बाजूहेडी गांव को जोड़ने वाला पुल। रुड़की में गंगनहर वाला पुल और रुड़की के गणेशपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग 72 पर रुड़की शहर को जोड़ने वाला पुल।
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160 साल पहले बने थे पुल
सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मानें तो गंगनहर पर बनाए गए ये सारे पुल अंग्रेजों के शासन में 160 साल पहले बनाए गए थे।