सरकारी स्कूलों में चाक, खड़िया, पाटी, स्लेट से लेकर बांस की कलम व निब वाला पेन बीते दिनों की बात हो चली है। पर कोरानाकाल ने आम से लेकर खास के जीवन में बहुत से चीजें बदल दी थी। इससे स्कूल और बच्चे भी अछूते नहीं रहे। स्कूलों में आफलाइन क्लास बंद हुई और आनलाइन शिक्षण शुरू करना पड़ा। इसके कई दुष्प्रभाव भी सामने आए हैं। सबसे ज्यादा बहुत असर हैंड राइटिंग पर पड़ा। इससे अभिभावकों के साथ शिक्षक व महकमे के अधिकारी चिंतित हैं। इसलिए बच्चों की राइटिंग सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बार फिर से कलम और निबयुक्त पेन के प्रयोग पर जोर देने को कहा है। इसके लिए निर्देश भी जारी कर दिए गए।
दो साल तक कोरोना संक्रमण के कारण स्कूलों पर ताले लटके रहे। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया गया। ऑनलाइन शिक्षण महज खानापूर्ति ही साबित हुआ। पहले साल साल बिना परीक्षा कराए ही बच्चों को अगली कक्षा में प्रवेश दिलाया गया। इससे बच्चे और लापरवाह हो गए। सरकारी स्कूलों के बच्चों में सबसे ज्यादा लापरवाही देखने को मिली। बच्चे लिखना पढ़ना तक भूल गए। आफलाइन स्कूल खुले तो कई बदलाव छात्रों के व्यवहार और पढ़ाई को लेकर देखने के लिए मिला। वह लंबे समय तक कक्षा में बैठना ही भूल गए। इससे शिक्षकों को पढ़ाने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
अब जब पूरी तरह से आफलाइन शिक्षण शुरू हुआ और अधिकारियों निरीक्षण किया तो पता चला कि छात्रों की हैंड राइटिंग एकदम बिगड़ गई। बच्चों के लिख शब्द भी पढ़ने में नहीं आ रहे हैं।
इसलिए विभाग की ओर से सुंदर पढ़ाई के साथ ही सुंदर लेखन पर भी अध्यापकों को विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। समग्र शिक्षा के अपर राज्य परियोजना निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता की ओर से समस्त प्रधानाध्यापकों और प्रधानाचार्यों को आदेश जारी किए गए हैं कि वह बच्चों की हैंड राइटिंग सुधारने के लिए विशेेष कार्य करें। कहा गया है कि बच्चों की हैंड राइटिंग ठीक करने के लिए कलम या फिर निबयुक्त पेन से उन्हें अभ्यास कराया जाए।
कोरोना काल में लंबे समय तक स्कूल बंद रहने से बच्चों की हैंड राइटिंग पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। इससे जनपद के समस्त स्कूलों के अध्यापकों को छात्र-छात्राओं की हैंड राइटिंग सुधारने के लिए निर्देशित किया गया है।
- केके गुप्ता, मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार