टीबी के मरीजों को कुपोषण से बचाने के लिए सरकार मुफ्त पोषाहार भी देगी। स्वास्थ्य विभाग इसमें सामाजिक संस्थाओं की मदद लेगा। हरिद्वार जिले में करीब 3500 मरीजों का उपचार चल रहा है।
सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। मरीजों को मुफ्त दवा के साथ उपचार जारी रहने तक पोषण खरीदने के लिए हर महीने पांच सौ रुपये दिए जाते हैं। टीबी के मरीजों का इम्युनिट सिस्टम अन्य मरीजों की तुलना में कमजोर होता है। इसकी वजह से ये मरीज अक्सर कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में उनका उपचार कराने में लंबा समय लग जाता है। इसको देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग ने सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर टीबी मरीजों को नकद भुगतान के अलावा पोषण सामग्री देने की योजना बनाई है।
सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर मोहम्मद सलीम ने बताया कि पोषाहार उन्हीं मरीजों को दिया जाएगा, जो स्वीकृति देंगे। कुछ संपन्न लोग मुफ्त पोषाहार नहीं लेना चाहते। अभी तक 930 मरीजों ने सहमति दे दी है। इन मरीजों के नाम पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए हैं। 50 फीसदी मरीजों को पोषाहार देने का लक्ष्य रखा गया है। संवाद
मरीजों पर रिसर्च भी करेंगी संस्थाएं
सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर मोहम्मद सलीम ने बताया कि टीबी के मरीजों पर सामाजिक संस्थाएं रिसर्च भी करेंगी। इसमें जांचा जाएगा कि टीबी की दवा कितनी कारगर साबित हो रही है। मरीजों पर कोई विपरीत असर तो नहीं पड़ रहा है और मरीज के ठीक होने में कितने दिन लग रहे हैं। यह भी देखा जाएगा कि टीबी के मरीजों में अधिकांश संक्रमण किस स्तर का पाया जा रहा है। रिसर्च के बाद संस्थाएं रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को देंगी।
दवा देने के साथ ही पोषाहार मिलने से टीबी मरीजों को जल्द स्वस्थ्य करने में काफी मदद मिलेगी। उम्मीद है योजना शीघ्र शुरू हो जाएगी। योजना शुरू होते ही मरीजों को पोषाहार का लाभ पहुंचना शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. आरके सिंह, जिला टीबी अधिकारी