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- हरिद्वार पहुंचे सुरेंद्र कोली के परिजन और पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने मौत पर उठाए सवाल
- बोले, दो बार शव को देखा, नहीं लगता कि आत्महत्या की है, इसके पीछे साजिश
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। अल्मोड़ा से सुरेंद्र कोली का शव लेने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत और परिजनों ने इस घटना में साजिश होने की आशंका जताई है। नारायण रावत ने मीडिया के सामने आकर सवाल भी उठाए और इसे आत्महत्या न होने की बात कहते हुए पूरा मामला संदिग्ध बताया।
बोले, सात फुट के खोखे में दो गांठ वाली रस्सी से आत्महत्या नहीं हो सकती है। आशंका जताई कि हत्या के बाद रस्सी बांधकर आत्महत्या दिखाई गई होगी। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। वहीं, सुरेंद्र के भाइयों और बेटे ने मीडिया के सामने आने से मना कर दिया।
मीडिया से बातचीत में पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने कहा कि दो बार शव को देखा है, जिससे लगता नहीं कि सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या की है। करीब सात फुट के खोखे में आत्महत्या नहीं की जा सकती। गले में कसी रस्सी डबल गांठ की थी, उससे भी सुसाइड नहीं हो सकता।
नाक और मुंह से खून आ रहा था और खोखे का शटर खुला हुआ था, जिससे संदेह पैदा होता है कि उसके साथ घटना हुई है। इसके बाद गले पर रस्सी बांधकर आत्महत्या का रूप दिया गया। कहा कि इसमें स्थानीय स्तर पर ही कोई साजिश हो सकती है। इस घटना को निठारी से नहीं जोड़ा जा सकता।
नारायण सिंह रावत ने कहा कि सुरेंद्र कोली एक गरीब, अशिक्षित और दलित समाज से था। उसके खिलाफ मीडिया ट्रायल हुआ। 20 साल तक उसने अपने को निर्दोष साबित करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में उसे अंतिम केस में भी बाइज्जत बरी कर दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में ही 12 मामलों में उसे बरी कर दिया था। रावत ने कहा कि जिस व्यक्ति का पूरा भविष्य, परिवार और 20 साल की जिंदगी बर्बाद हो गई, उसके लिए सोचा जाना चाहिए था कि वह समाज में कैसे खड़ा होगा। रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई। अब उसकी मौत के बाद परिवार आज भी आर्थिक, सामाजिक तंगी और जातिगत भेदभाव का शिकार है।
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मां के सिर पर हाथ रखकर कहा, मैंने ये सब नहीं किया
नारायण सिंह रावत ने बताया कि फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद वह उसकी मां को चौधरी चरण सिंह जेल में मिलवाने गए थे। मां ने जब उससे पूछा कि ये सब क्यों किया तो उसने उनके सिर पर हाथ रखकर कहा था कि ये उसने नहीं किया है। तब मां ने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा था कि अगर तूने कुछ नहीं किया तो ईश्वर तेरा कुछ नहीं बिगड़ने देगा। इसके बाद वह हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से बाइज्जत बरी भी हुआ।
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खोखा हटने की बात से मानसिक परेशान थे
परिवार और नारायण सिंह रावत ने खोखे के मामले में कहा कि नगर निगम को देखना चाहिए कि कहां क्या लगा है। पहले लगवा देते हैं और फिर हटवाते हैं। कहा कि सुरेंद्र कोली की उनसे बात हुई थी। वह मानसिक रूप से बेहद परेशान थे। उन्होंने बताया था कि खोखा किराए पर ले लिया है। एडवांस पैसे आगे अनिल शर्मा नाम के व्यक्ति को दिए हैं, अभी और देने हैं। अब पता चला कि अतिक्रमण में खोखा हटाया जाना है।
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भाइयों ने जान को खतरा बताया
सुरेंद्र कोली के भाई कैमरे के सामने आकर नहीं बोले लेकिन बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उनके परिवारों को भी खतरा बना हुआ है। उनके छोटे बच्चे हैं। वह प्रदेश में रहते हैं, इसलिए उन्हें अपनी सुरक्षा की भी चिंता है। जिनके बच्चे मारे गए, उनका कुछ पता नहीं है कि कब क्या कर दें।
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20 साल में पिता का प्यार मिला, वो भी छीन गया
जिला अस्पताल परिसर में खड़े सुरेंद्र कोली के 20 वर्षीय बेटे शिवम के शब्दों ने एक बार को सभी को झकझोर दिया। उसने कहा कि 20 साल में उसे पिता का प्यार मिला था लेकिन अब वो भी छीन गया। इसके बाद वह खामोश हो गया और आंखें भर आई। पिता की मौत के बाद उसका दर्द छलका। कोली का बेटा कुछ समय से अपने ताऊ के साथ रह रहा था जबकि बेटी की शादी हो चुकी है।