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खुद कमजोर पर लोकतंत्र को करेंगे मजबूत

Tue, 14 Feb 2017 09:33 PM IST
मेहताब आलम हरिद्वार
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वे खुद कमजोर हैं, चलने फिरने के लिए भी दूसरों के सहारे की दरकार है, लेकिन वोट देकर लोकतंत्र मजबूत करने का जज्बा उनमें भी आम नागरिकों की तरह बरकरार है।
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जनपद में बुधवार को 13 लाख से अधिक मतदाता अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 4567 दिव्यांग मतदाता भी लोकतंत्र के यज्ञ में पूर्णाहुति डालेंगे। खासकर उत्तरी हरिद्वार के अजरानंद अंध विद्यालय के नेत्रहीन छात्रों में हर चुनाव की तरह इस बार भी मतदान को लेकर खासा उत्साह बना हुआ है। बुधवार को जनपद की 11 विधानसभा सीटों पर अपना नुमाइंदा चुनने के लिए वोट डालेंगे। इन मतदाताओं में कुल 4567 दिव्यांग मतदाता भी शामिल हैं। 3763 मतदाता ऐसे हैं, जिन्हें चलने फिरने के लिए सहारे की जरूरत पड़ती है। वहीं 178 मतदाता हाथ और पैर दोनों से लाचार हैं।   
    
इनमें 628 मतदाता ऐसे भी हैं, जो देख नहीं सकते। नेत्रहीन मतदाताओं में लगभग आधे उत्तरी हरिद्वार के अजरानंद अंध विद्यालय के छात्र हैं। जो हर चुनाव में बढ़ चढ़कर मतदान में हिस्सा ही नहीं लेते हैं, बल्कि उन्हें मतदान के दिन का इंतजार रहता है। निर्वाचन आयोग ने जिले भर में दिव्यांग मतदाताओं की सुविधा के लिए पोलिंग बूथों पर खास इंतजाम किए हैं।  बूथों पर रैंप बनवाने के साथ ही मदद के लिए अतिरिक्त कार्मिकों की तैनाती भी की गई है।      
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विद्या टोलियां बनेंगी ‘बैसाखी’      
दिव्यांग मतदाताओं के वोट डलवाने के लिए छात्र-छात्राओं की विद्या टोलियां पोलिंग बूथों पर मुस्तैद रहेंगे। स्काउट गाइड, एनसीसी व एनएसएस के स्वयंसेवी इन टोलियों के रूप में दिव्यांग मतदाताओं को घर से बूथ तक लाने में मदद करेंगे। शिक्षा विभाग की पहल पर इस बार यह कवायद की गई है। जनपद में एक हजार से ज्यादा छात्र छात्राओं को इस कार्य में लगाया गया है। सबसे ज्यादा मतदाताओं को वोट डलवाने वाली टोलियों को खुद जिला निर्वाचन अधिकारी पुरस्कार देंगे।      
 
दिव्यांगों पर प्रत्याशियों की भी पूरी नजर      
किस बूथ पर कितने दिव्यांग मतदाता हैं, यह जानकारी सिर्फ निर्वाचन आयोग को ही नहीं है, बल्कि प्रत्याशियों की उंगलियों पर भी पूरे आंकड़े हैं। अधिकांश दलीय प्रत्याशियों ने तो बुजुर्ग व लाचार मतदाताओं का वोट डलवाने के लिए पारंपरिक रूप से टीमों का गठन किया है। वाहनों में बैठाकर घर से पोलिंग बूथ तक लाने की जिम्मेदारियां मंगलवार देर शाम तक बांटी जाती रही। देहात में तो कई जगह काफी बुजुर्ग व गंभीर बीमारों का वोट डलवाने के लिए चारपाई तक का इंतजाम किया गया है।
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