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पत्नी की गला दबाकर हत्या

Mon, 26 Dec 2016 12:12 AM IST
hridwar uttrakhanda india
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पत्नी को मार डाला - फोटो : अमर उजाला
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एक पति ने अपनी पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी। पत्नी अपने भाई की मौत का जिम्मेदार अपने पति को ठहराते हुए रोजाना कलह करती थी। पत्नी की हत्या करने के बाद पति रात भर शव के पास ही सोया रहा।  आरोपी पति ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। मृतका के भाई ने जीजा के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया है।
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घटना ज्वालापुर की कालोनी बस्ती (कड़च्छ ) की है। मूल रुप से सहारनपुर के मोहल्ला गढ़ी मलूम नंबर एक कोतवाली सब्जी मंडी निवासी काला पुत्र मोहन की शादी दस वर्ष पहले गांव एक्कड़ कलां निवासी रमेशो की बेटी कमलेश उर्फ काकी से हुई थी। करीब आठ माह से वह अपने परिवार समेत सास रमेशो के मकान में रह रहा था और दिहाड़ी मजदूरी कर रहा था।
मोहल्ले में ही कुछ दूरी पर रहने वाली कमलेश की छोटी बहन सोनिया सुबह अचानक बहन के घर पहुंच गई तब उसके होश उड़ गए। देखा कि उसकी बहन मरी हुई थी और जीजा भी मौके पर ही था। छोटी बहन ने तुरंत पड़ोसियों को बुला लिया। सिटी पुलिस कंट्रोल रूम की सूचना के बाद ज्वालापुर पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने जब पति से पूछताछ की तब उसने सीधे सीधे अपने गुनाह कबूला। सीओ सदर जेपी जुयाल ने बताया कि आरोपी ने बताया कि उसके साले मनोज ने दो साल पूर्व खुदकुशी कर ली थी। तब से उसकी पत्नी अपने भाई की मौत का जिम्मेदार उसे ही मानती थी और रोजाना झगड़ती थी। शनिवार की देर रात दस बजे करीब भी दंपति के बीच झगड़ा हुआ था। तब गुस्से में आकर काला ने पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी। फिर शव के पास ही सो गया। मृतका के भाई जोगेंद्र की ओर से मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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मासूमों ने बयां की मां की हत्या की कहानी
हरिद्वार (ब्यूरो)। तुतलाती जुबान में मासूम भाई हत्याकांड की पूरी कहानी सिलसिलेवार बयां करते रहे। आठ साल के मयंक और उससे दो साल छोटे हर्ष ने पिता की दरिंदगी का खुलासा किया। मासूम बोले कि, पापा ने मम्मी का मुंह भींच यानि दबाकर मार दिया। इसके बाद पापा सो गए। मासूमों से जब पूछा कि वो क्या कर रहे थे। तब बोले कि हम भी झूठ मूठ सोने का नाटक कर रहे थे। तीसरे भाई हिमांशु को अभी कुछ पता ही नहीं है।
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पति को नहीं पश्चताप
हरिद्वार। पत्नी को मौत की नींद सुला देने वाले काला को जरा भी पश्चताप नहीं है। पूछने पर तपाक से बोलता है कि कुछ गलत नहीं किया। रोज की किच किच से आजिज आ गया था। आखिर मारता नहीं तो क्या करता।  आसमान की तरफ इशारा कर बोलता है कि सच्चाई की ही जीत होती है। घटनास्थल से न भागने के सवाल पर कहा कि भागकर कहां जाता। खुद से तो नहीं भाग सकता था।
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