नदी उत्सव में हरिद्वार से शामिल हुईं डॉ. राधिका ने जल सम्मान पर दिया जोर
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली में 7वां नदी उत्सव नदियों की रक्षा के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। इसमें विद्वानों, पर्यावरणविदों और नागरिकों ने नदियों की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। संहिता फाउंडेशन के सहयोग से नदी और जल से संबंध शीर्षक से एक विशेष सत्र भी आयोजित हुआ। इसमें हरिद्वार से मुख्य वक्ता डॉ. राधिका नागरथ ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के यमुना और गंगा को सजीव इकाई घोषित करने के फैसले का विरोध किया।
उन्होंने बताया कि मार्च 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने कहा था कि कानून नदी को मनुष्य के समान नहीं मानता। प्राकृतिक आपदाओं से आए मलबे पर दंड का प्रावधान न होने से यह रोक लगी। डॉ. राधिका नागरथ ने जोर दिया कि नदियों को स्वच्छ रखने के लिए जनभागीदारी और जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने सरकार से नदी तटों पर सुविधाएं बनाने और मानव अपशिष्ट रोकने के लिए दीवारें बनाने का आग्रह किया। डॉ. राधिका नागरथ ने जनमानस से अपील की, नदियों को बहने दो, जल का सम्मान करो।
वक्ताओं ने सर्वसम्मति से नदियों का सम्मान करने और उन पर निर्माण तथा पहाड़ों को नष्ट करने पर रोक लगाने की मांग की। डॉ. तेनजिन डोल्मा, डॉ. ओंकार मित्तल, लेखक विद्या भूषण रावत और प्रदीप डिमरी ने बढ़ती जल परियोजनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने नदियों पर मानव जनित खतरे को रेखांकित किया। संहिता फाउंडेशन के कौशल किशोर ने नदियों के संरक्षण में कार्यकर्ताओं की भूमिका का वर्णन किया। उन्होंने वैज्ञानिक जीडी अग्रवाल को याद किया, जिन्होंने गंगा संरक्षण के लिए उपवास किया और प्राणों की आहुति दी।