सरकार की ओर से स्कूलों में एनसीआरटी की किताबें तो लगा दी गई हैं, पर निजी स्कूलों की ओर से कमीशन के खेल के लिए अतिरिक्त किताबों का भार अभिभावकों पर डाल रहे हैं। अतिरिक्त किताबों के दाम एनसीआरटी से भी दोगुना हैं।
अभिभावकों को राहत देने के लिए सरकार की ओर से एनसीआरटी की किताबें लागू की गई है। ये किताबें कक्षा एक से आठ तक की हैं। ताकि सरकारी और निजी स्कूलों में एनसीआरटी की किताबें लागू होने से अभिभावकों का आर्थिक भार कम किया जा सके। पर निजी स्कूलों ने सरकार से एक कदम आगे बढ़ते हुए एनसीसीआरटी के साथ ही अतिरिक्त किताबों को थोपना शुरू कर दिया है। हर स्कूल की तरफ से अपने-अपने अनुसार किताबें लगाई गई हैं। खास बात यह है कि एनसीसीआरटी की किताबों की कीमत 50 रुपये के आसपास में होती है, लेकिन अतिरिक्त किताबों में से हर पुस्तक की कीमत सौ रुपये से अधिक है। कहीं कंप्यूटर किताबों के नाम पर तो कहीं सामान्य ज्ञान आदि के किताबें खरीदने का पर्चा थमा दिया जा रहा है। इसके कारण अतिरिक्त किताबें खरीदने में ही जेबें ढीली हो रही हैं।
सरकार की ओर से लगाए गए एनसीआरटी के पाठ्यक्रम के अलावा निजी स्कूल अतिरिक्त किताबें भी जबरन लगा रहे हैं। ये किताबें काफी महंगी हैं। स्कूलों की मनमानी के आगे अभिभावक बेबस हैं।
- सुशीला
लॉकडाउन के बाद खुले स्कूलों की ओर से फिर से खेल शुरू कर दिया गया है। किताबों के नाम पर अभिभावकों को आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
- नीशा
निजी स्कूल अभिभावकों को लूटने के अड्डे बन चुके हैं। सरकार की ओर से स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर
किताबों के नाम पर मच रही लूट को बंद करना चाहिए।
- नीशू कुमार
शिक्षा का बाजारीकरण हो गया है। किताबों के नाम पर अब अभिभावकों को लूटा जा रहा है। अधिकारी कोई कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।
- देवेंद्र सिंह