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सरिया घुसने से पुलिसकर्मी की मौत

Fri, 10 Feb 2017 10:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
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स्वामी शिवानंद की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी अभिषेक की प्रेमनगर आश्रम पुल के समीप निर्माणाधीन फ्लाईओवर का सरिया शरीर में घुसने से मौके पर ही मौत हो गई। उसकी बाइक छोटी नहर में गिरी हुई थी। मृतक मूल रूप से घनसाली (टिहरी) का रहने वाला था। फिलहाल उसके माता-पिता भानियावाला (देहरादून) में रहते हैं।


रोशनाबाद पुलिसलाइन में तैनात सशस्त्र पुलिस के सिपाही अभिषेक कठैत (28) इन दिनों मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती की सुरक्षा में था। बृहस्पतिवार देर रात वह अपनी बाइक से एक दोस्त से मिलने की बात कहकर आश्रम से निकला। शुक्रवार सुबह गंगनहर पटरी पर घूमने निकले शहरवासियों ने गंगनहर से निकल रही छोटी नहर में निर्माणाधीन फ्लाईओवर के सरिये में एक शव फंसा देखकर पुलिस को सूचना दी। इस पर एसओ कनखल नत्थीलाल उनियाल पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। घटनास्थल पर शव के पास बाइक पड़ी थी और नीचे जूते भी पड़े थे।
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युवक की जेब से मिले पर्स से उसका पुलिस का परिचय पत्र बरामद हुआ। पुलिसकर्मी की मौत की सूचना मिलते ही आला अफसर भी घटनास्थल पर पहुंच गए। शव निकलवा कर पुलिस ने उसे मोरचरी भिजवाया। थानाध्यक्ष नत्थीलाल ने बताया कि जेब से मोबाइल फोन, नगदी, एटीएम कार्ड बरामद हुआ है। संभवत: अभिषेक सिंहद्वार चौक की तरफ से आ रहा था, लेकिन तेज गति में होने के कारण वह प्रेमनगर आश्रम पुल से पहले मोड़ पर नीचे छोटी नहर में गिर गया होगा। अंधेरा होने से रातभर उसे कोई देख भी नहीं पाया। सिपाही मूल रूप से घनसाली (टिहरी) का रहने वाला था। फिलहाल उसका परिवार भानियावाला, देहरादून में रहता है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। शिवानंद की सुरक्षा से पहले पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी की सुरक्षा में भी वह तैनात रहा था। पूर्व पालिकाध्यक्ष ने भी जिला अस्पताल पहुंचकर मृतक के पिता को ढांढस बंधाया।             
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शादी के संजोए थे सपने            
जिला अस्पताल में मौजूद पिता बचन सिंह कठैत विलाप में डूबे रहे। हर कोई उन्हें संभालता रहा। वर्ष 2012 में उत्तराखंड पुलिस का हिस्सा बने दिवंगत अभिषेक कठैत के दो बड़े भाई शिक्षक है और चौथे नंबर का भाई पढ़ाई कर रहा है। बकौल पिता, दो दिन पहले ही अभिषेक घर आया था। उसकी शादी के सपने संजोए जा रहे थे। कई रिश्ते आ रहे थे, जल्द बात फाइनल होनी थी, लेकिन भगवान को यह सब मंजूर नहीं था।
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